स्थानीय तहमे ‘थारु भाषा’ हे कामकाजी बनैनावारे बहस

धनगढी, ३० कुवाँर । कैलालीके थारु बाहुल्य स्थानीय तहमे थारु भाषाहे कामकाजी बनाइक पर्नामे बहस सुरु हुइल बा । नेपालके संविधान सक्कु मातृ भाषाहे राष्ट्रिय भाषाके रुपमे संस्थागत करल ओ स्थानीय तहहे कामकाजी बनाइ सेक्ना अधिकार हुइलओरसे फेन थारु बाहुल्य तहमे कामकाजी बनाइक पर्नामे आवाज उठे लागल हो ।

जिल्लाके कैलारी, जानकी, जोशीपुर, बर्दगोरिया गाउँपालिका तथा भजनी, गौरीगंगा, टीकापुर नगरपालिका थारु बाहुल्य स्थानीय हो । यी स्थानीय तहमे थारु भाषाहे कामकाजी बनाइक पर्ना थारु अगुवाहुक्रे जोड डेले बाटै ।

थारु अगुवा चन्द्रसिंह चौधरी जिल्लाके अन्य स्थानीय तह मध्य सबसे ढिउर थारु समुदायके बसोबास रहलओर स्थानीय तहमे थारु भाषाहे कामकाजी बनाइक पर्ना बटैठै ।

उहाँ कहलै–‘स्थानीय तहहे कामकाजी बनैना प्रावधान रहल बा, जौन अनुसार नेवार समुदाय किर्तिपुर नगरपालिकामे नेवारी भाषाहे कामकाजी बनैले बाटै, ओस्टहे फेन यहाँके सक्कु क्षेत्रमे थारु भाषा प्रयोग हुइठ, कामकाजी बनैलेसे जातिय समुदायके सम्मान ओ भाषाके संरक्षणमे टेवा पुगी ।’

थारु नागरिक समाज कैलालीके संयोजक दिलबहादुर चौधरी फेन जिल्लाके कुछ नगरपालिका ओ गाउँपालिकामे थारु भाषाहे कामकाजी बनाइक पर्नामे जनप्रतिनिधिहुकनके ध्यान जाइक पर्ना बटैलै । जिल्लाके कैलारी, जोशीपुर, बर्दगोरिया, जानकी गापा, भजनी नगरपालिकामे कामकाजी किल नाई होके स्थानीय तहस्थित विद्यालयमे थारु भाषाके पाठ्यक्रम फेन लागु करेक पर्नामे जनप्रतिनिधिहुक्रे अग्रसर हुइक पर्ना जोड डेलै ।

जिल्लाके अन्य स्थानीय तह जस्ते कैलारी गाउँपालिकामे फेन थारु भाषाहे कामकाजी बनाई सेकजिना ढिउर आधार बा । जातीय जनसंख्या, भाषिक अनुपात, रहनसहन, संस्कृतिहे फेन आधार बनाके कामकाजी बनाइ सेकजिना आधार रहल बा ।

कैलारी गाउँपालिकाके पश्र्वचित्र (प्रोफाइल) अनुसार कैलारी गाउँपालिकाके ८८ प्रतिशत जनसंख्यासे थारु भाषा बोलजाइठ । कलेसे नेपाली भाषा केवल ६.५५ प्रतिशत किल प्रयोग करजाइठ । कलेसे मैथिली भाषा १ प्रतिशत, बझाँगी भाषा ०.२८ प्रतिशत, डोटेली भाषा ३.७४ प्रतिशत ओ सबसे कम दैलेखी भाषा ०.०३ प्रतिशत जनसंख्यासे प्रयोग हुइठ ।

२०६८ सालके जनगणनाहे आधार बनाके तयार पारल उ प्रोफाइलमे जातीय जनसंख्याके विवरण अुनसार थारु समुदायके जनसंख्या ४१ हजार ९८७ रहल बा कलेसे सबसे कम ७ जाने बंगाली रहल बाटै । साथे क्षेत्री २ हजार १९४ जाने, पहाडी ब्राह्मण १ हजार १६, मगर २२१, मुसलमान २९, कामी १ हजार २७६, नेवार २७, दमाई २६७, ठकुरी २१२, सार्की १९६, लोहार ६७, वादी ४३, राजवंशी ३३, बंगाली ७, तराई ब्राह्मण १७, दलित अन्य २३७ ओ अन्य १५८ जाने रहल उल्लेख बा ।

एकठो रमाइलो पक्ष का बा कलेसे, थारु बाहुल्य स्थानीय तहस्थित अधिकांश सरकारी तथा गैरसरकारी कार्यालयमे लिखित वाहेक प्रमुख सम्पर्क भाषाके रुपमे थारु भाषाहे प्रयोग करजाइठ । जौनकारण फेन कामकाजी बनैनामे केवल औपचारिक घोषणा किल बाँकी रहलओरसे गाउँपालिकाके ध्यान जाइक पर्ना बटैठै काँग्रेसके कैलारी गाउँपालिका अध्यक्षके उम्मेदवार फेन होसेकल थारु अगुवा राजसमझ चौधरी ।
उहाँ भाषा, संस्कृति, चालचलन संरक्षण ओ सम्वद्र्धन कर्ना स्थानीय तहके जिम्मेवारी ओ दायित्व रहलओरसे ध्यान जाइक पर्ना बटैलै । जेकरलाग अप्नेहुक्रे सहयोग कर्ना प्रतिवद्ध रहल फेन उहाँके कहाई बा ।

कैलारी गाउँपालिका अध्यक्ष लाजुराम चौधरी थारु भाषाहे कामकाजी बनाइकलाग सक्कु पक्षबीच छलफलके खाँचो रहल बटैलै । स्थानीय तहके क्षेत्रअधिकार अनुसार बनाइक सेकजिना प्रावधान रहलेसे फेन सबसे पहिले स्थानीय जनताहुकनके माग फेन आइ परल बटैलै ।

‘थारु भाषाहे कामकाजी बनैनावारे कैलारी गाउँपालिकामे किल सीमित नैपारके जिल्लाके सक्कु स्थानीय तहमे बहस छलफल चलैना जरुरी बा । जिल्लाके अधिकाशं स्थानीय थारु बाहुल्य हो । बहस सकारात्मक रहलओरसे सक्कु पक्षके सहयोग फेन जरुरी बा । जेकर लाग तत्पर बाटु ।’

अध्यक्ष चौधरीके अुनसार भाषालगायत महत्वपूर्ण पक्षवारे निर्णय करेक लाग जनताहुकनके मागसहित गाउँकार्यपालिकासे विधेयक पास कर्ना रहठ । विधेयक पास हुइलपाछे गाउँसभासे अुनुमोदन करलपाछे कार्यान्वयन कर्ना ओ नैकर्ना प्रक्रिया आघे बह्रठ ।