अन्नवाली अख्वारी कर्ना अटुवा हेराइटी

कैलाली, १७ भदौ ।
कौनो बेला अन्नवाली अख्वारी (रेखदेख) करेक् लाग बनाजिना अटुवा आबभर बहुट कम बिल्गाइ लागल बा । जंगली जानबर, चिरैचुरुंगान्से धान, मकै, गोहुलगायत अन्नबाली बचाइक लाग खेटुवा वा डिहुवा (मकै बारी) मे बनाजिना करिब १५/२० फिट ढेंग अटुवा करिब लोप होसेकल बा ।

आधुनिकताके क्रम संगे बह्रल वन विनाश ओ चोरी सिकारीसे बन्यजन्तु ओ चिरैचुरुंगीन्के संख्यामे हुइल कमीके कारण अटुवा बनैना प्रचलन फेन हटल बा । अभिन फेन आपन मकै बारीमे अटुवा बनैटी आइल कैलारी गाउँपालिका–६ बेनौलीके सुझावन डंगौरा मकै बाली बचाइक लाग अटुवा बनैटी आइल जानकारी डेलै ।

मकैमे लग्न सुगा, वनसुंव्वरलगायत बन्यजन्तुन्हे भगाइक लाग ओ हुइ सेक्ना चोरी नियन्त्रणके लाग प्रत्येक बरस मकै बारीमे अटुवा बनैटी आइल उहाँ बटैलै । उहाँके अनुसार १५÷२० फिट लम्मा–लम्मा काठुवाके प्रयोगसे अटुवा बना जाइठ ।

जेकर उप्परके तहमे खटिया अटैना ठाउँ बनाके घाम पानीसे बचेक लाग खरसे छैना काम करजाइठ । असिक बनाजिना अटुवामे बैठ्ना मनैन्हे जंगली जानवरसे जोखिम नैरहठ ।

साथे आइल बन्यजन्तुन्हे दुरेसे डेखे सेकजिना हुइलओरसे पहिलेहि सतर्कता अप्नाइ सेक जाइठ । बुढापाखाहुकनके अनुसार पहिले–पहिले अटुवामे बैठ्के थारु समुदायके ठ¥र्या–बठिनियाहुक्रे अन्नवालीके अख्वारी फेन करै ।

जहाँ बैठके घरायसी तथा विशेष कार्यक्रममे प्रयोगके लाग दिनभर रंगीविरंगी ढकिया, डेलुवालगायत चीज बिनै । जौनक्रममे ठ¥र्या–बठिनियाहुकनबीच प्रेमलाभ हुइल टमान साहित्य सिर्जना हुइल पेन पाजाइठ ।

जस्टे कि–‘अटुवामे बैठके बलाई.. मटवाली गोरी (बाँकी ३ पेजमे) जोर–जोरसे’ कना गीत फेन थारु समुदायमे बहुट चर्चित गीत मानजाइठ थारु समुदायमे । ओस्टके, मै टे गैनु डिहुवामे घाँस काटे गोरी रहै डिहुवाके अटुवामे सुग्गा बोललै, हो..गोरी महिन डेखलै अटुवामे बैठके कचर–कचर गोंरी बिन्ना लाल पियर रंगसे डेलुवा सजैना ।

जसिन टमान थारु भाषाक् लोक साहित्य अटुवाके पृष्ठभूमिसे सिर्जल बटैठै, बेनौलीके यूवा साहित्यकार मनिराम चौधरी । अटुवा ओ थारु समुदायके रहनसहन बीच बहुट गहिर सम्बन्ध रहल फेन उहाँके कहाई बा ।