कविटा : उठो जागो
टुह थारू अपनही अपन थारूट्व हेर्वाईटो।
डटसे मार पैली कैहके जनटन डेर्वाईटो।।
भुलैना नाई हो दुख इटिहासमे लिखे परी।
अब दुख बिलाप छोरके जोशहोशमे लरी।।
सहलेउ पिर नुकालेउ अब आँखीक आँस।
लरटी रहब जब सम रहि शरिरमे साँस।।
अगुवा बिन्टी बा नबनो स्वार्ठीनके डास।
सक्कु जग्गा छिन्नै छिन्ही हमार घरबास।।
जब टोर मोर पार्टी कैहके थारू फुट्नै।
सट्टाडारी शासक थारून लुट्ना लुट्नै।।
उठल थारू हकहिट अढिकारके अवाज।
निकर्नै टमान थारूए मन्से ढोखेबाज।।
मिठ मिठ बाटसे जनटान आँढर बनाके।
कट्टर थारून लैगिनै जंजीरमे कसाके।।
टरे डबैना सोंचल सम्झल रचल साजिस।
टिकापुरमे मौका मिलल घोर्न लग बिस।।
चलाक दलाल स्वार्ठीन ईनाम मोटरकार।
निर्डोस थारू अगुवान मिलल कारागार।।
कब सम डबटी रहब फेर उठी थारू सब।
मुन्टीम मुटे लग्नै डेखाई थारूट्व अब।।
कत्रा डबैली अब अवाज बुलन्ड पारी।
अपन हकके लग एक परगा आगे सारी।।
उठो जागो अब ऐ१ मोर टिकापुर बासी।
कब सम रख्बो मनमे डर पिरा उडासी।।
सरकार हमार मट कडर न बडर करल।
निकर्न समय आईल मनेक रिस डबल।।
निर्डोस जंजीरमे बाँढल बा थारू बेटा।
हमार लग लरूईया ओहे हो खास नेटा।।
मिलके सब फेरसे आउ अवाज उठाई।
अपन राजबन्डी अगुवान जेलसे छुटाई।।
एकचो छलकपट स्वार्ठसे उप्पर उठ्के।
पक्कै सफल हुब लरी सब थारू जुट्के।।
असिराम डंगौरा
जोशीपुर ५ सिमराना (हाल गुजरात)













