कथा : जिम्मेवारीके अनुभुति
सुग्घर बिहानसंगे केउबोलइलक आवाज आइट , शिव सर चा खाइ आइ । ओहे चौरके कुर्सीमे बइठी संघरियन । अस्टके सक्कु जनहनके स्विकृती हुइल कि ओहे चौरमे बइठके चा पिटी बिहानक समय बिटइना । जेम्स भैया, अपनेहे टनिक सन्चो नाइ हो जैसिन देखाइटो ट, गुरु पुछ्लै । जेम्सके जवाफ,हजुर डाडुकाल रातसे टनिक सास बरहल जैसिन बा ।
जाटिक आज सानुमाया बहिनीया नइ उठल हुइ ना ? रातभर खोख टही । अस्टके एक डोसरके सन्चो विसन्चो पुछटी चा के चुस्की लेटी वृद्धा आश्रमके दिनचर्या सुरु हुइट ।
लि आज भरशिव सरके कामके अनुभव सुनाइ ना कइसिन रहे वहाँक जीवन । हा, हुइट । शिव सर एकघचिक विचार करटी चाके चुस्की लेटी मुसुक्क हस्टी कहलै । (I have great times and experiences in my life) मइ आपन जीवनमे ढेर मजा समय ओ मजा अनुभव करले बटु । मै नेपाल राष्ट बैंकमे म्यानेजरके पदमे नोकरी करु । एम वि ए पढाइ पुरा करलक कुछ महिना पाछे मै बैंकके म्यानेजरमे नियुक्त हुइनु । कुछ नयाँ काम करना सपना मोर म छोटहीसे रहे । बैंकके म्यानेजरमे नियुक्त हुइलक दिनसे जोस जांगर ओ तनमनसे बैंकके विकासमे लग्नु । काम बहरटी गइल ओ महिन आपन कार्य तालिका मिलइना कर्रा परे लागल । तब जाके मोर स्टाफ ओइनके सल्लाह बमोजिम पि.ए. (व्यक्तिगत लेखापाल) ढरना बाट हुइल । पि.ए छन्ली ढेउर प्रतिस्पर्धीनके बीचमे खुशी हे । नाम अनुसार उ फेन हसिलो ओ शुसिल रही । उ अफिसमे सामेल हुइलपाछे महिन बहुट सजिलो हुइल । मोर समय व्यवस्थापन करडेना ओ महिन काममे सहयोग करना हुकहार काम रहिन । उ बहुट क्ष्लतभििष्नभलत तिक्ष्ण रहि । सक्कु काम उ व्यवस्थित ढंगसे मिलाई । हुकहार अइसिन चलाखीपूर्ण ओ व्यवस्थित काम देखके मइ बहुट प्रभावित हुइल रहु । एकदिन मइ हुकहार परिवारसे भेट करे ओ बेरी खाइ हुकहार घर गइनु । ओहे भेटघाटमे खुशीके डाइबाबासे हुकहार हात मग्नु ।
मइ सक्कु बाट सोझे करना हुइलक ओरसे हुइ, मइ हुकहार डाइबाबासे फेन सिधा बाट करनु । अस्टके खुशी ओ मइ एक रथके दुई चक्का हुइली । मोर जीवन खुशीक संग खुशी खुशी बिटे लागल । हमार परिवारिक खुशी जीवन ओ मइयाके निशानी हमार छावा विजयके जन्म हुइल । मोर जीवनमे मोर गोसिन्या खुशी आउर ढेउर खुशीले भरडेहली । छावा विजयहे मजा शिक्षा डेहे लग्ली । विजय उज्जवल विद्यार्थीके साथे असल छावा फेन रहे ।
उहिनहे असल शिक्षा डेना ओ नैतिक आचरण सिखइना बाटम हम्र कौनो कमि नइ करली । हमार सक्कु लगानी, हमार छावा विजयके मे खर्च कइली । खुशी ओ मइ मिलके हमार छावा विजयहे असल मनैया बनइली । अब्बे विजय पाइलट बनल बा । हमरे उहिनहे ओकर इच्छा अनुसार पाइलट बन्नामे सहयोग कइके डाइबाबानके जिम्मेवारी पूरा करली । उ प्राय संसारके बहुटसे ढेर देश घुम्टी रहट । उ घर कबुकाल किल आइट ।
चा के चुस्कीसंगे एकघचिकसक्कुजे कुछ सोचे असक समय शान्त होगइल ।
अली उ मौनताहे टुरटी कठ, अपनेक छावा विजय अत्रा असल हुइटी—हुइटी फेन अपने काहे यि वृद्धाश्रमम शिव सर ?
गहिर सोचाइमे जाके एकघचिक पाछे शिव सर कहलै, दुई वर्ष आघे मोरिक प्यारी जन्नी खुशी महिन छोरके यि संसारसे विदा होगइली । हुकहार बिना मइ अकेली हो गइनु । विजय जबफेन बाहर चिलगारीसंग उरटी रहट । घरेम पटुहिया बटी, उ फेन काममे व्यस्त रठी । घरेम महिनसे बाट करुइया कोइ फेन नइ रहट अनि घरेम बइठना मन फेन नइ लागट । टबे यहाँ बइठे लग्नु । घरेम सक्कु चिज बा मनो मनमे सन्तुष्टी नइ हो । यि वृद्धाश्रममे सुविधा कम बा, मनो मनमे पूर्ण शान्ति बा । अपनेनसंग बइठके समय सहजे बिटजाइट । आब बाँकी जीवन यहोरे बिटइना मन बा । अब कत्रा ढेर जियम र ?
अब्बे गुरुक छावा इन्जिजियर हुइल बाटिन, भोज हुइल पाछे बाबाहे घरसे बाहर निकार डेलिन हु । अब्बेके पुस्ता ढेउर स्वतन्त्रता खोज्ठै ओ ओहे अनुसार जीवन बिटाइक खोज्ठै । सफलताके पाछे भागटै मनो जिम्मेवारी बिस्राइटै । साएद टबे अली, गुरु सहारा खोज्टी आश्रममे आइलै । अलीहे छाइनके घर जइना ओ बइठना इमानले नैडेठिन । यहे आश्रममे खुशी बटै । जेम्सके छाइ अब्बे अस्ट्रेलियामे डाक्टर बाटिन । नेपालमे कोइ नइ हुइलक ओरसे, उहिनहे छाइ आश्रममे बइठा डेलिन । सक्कु बुरहाइल मनैनके लाग यि आश्रम असल ठाउँ बनल बा, आश्रममे सक्कुजे खुशी बटै ।
ओइनके एकठो छावा बाटिन सोमु , सक्कु बुरहाइल मनैनके बहुट हेरचाह करुइया । आपन सक्कु श्रमशक्ति यहे आश्रममे खर्च करुइया । सोमुके बाबा गरीब हुइलक कारण बहुट दुख कइके छावाहे परहाके योग्य बनैलै । जीवनके अन्तिम क्षणसम छावाक संग बइठना सोमुके बाबाक चाहना रहिन । गइल बरष सोमु के बाबा खुशी खुशी सोमुके कोनुम आपन प्राण त्याग कइलिन । सोमुके बाबा बहुट भाग्यमानी रहिन, जे खुशी खुशी आपन जीन्गी बिटइटी अन्तिममे आपन छावाक कोनुम प्राण त्याग कइलै । सोमु आपन डाइहे फेन बहुट मइया करठै । वट्रा किल नाही, आश्रमके सक्कु जनहन मइया करठै । सक्कु जनहन डाइबाबा बराबरके दर्जा डेठै । सोमुके बरवार ह्दयके कारण सक्कु बुरहाइल मनै आश्रममे बइठे पइले बटै । हुकहार महान काम डेखके हमार छाती गर्वसे चौडा हुइट । गरिब किसानके छावक उदारता ओ लगन देखके सलाम करना मन लागट । हमार बुढेसकालके सहारा ओ जिम्मेवारीमे कबु फेन पाछे नइ परना हमार सक्कु जनहनके दुलारु छावा हुइट सोमु।













