माघी
बर्षके बाद थारु समुदायमे माघी आईल
धेर लम्मा इतिहास बोक्ल माघी आईल ।
घर घरमे खुसियालीके सदा बहार लैके
पुर्खान्के बनाईल गर्व बोक्ल माघी आईल ।।
नयाँ बर्षके हर्ष उमङ्ग आउर जोस लैके
थारू समाजमे रौनक बोक्ल माघी आईल ।।।
बिगतके समय सम्झत थारूनके पहिचान
पहिलेक जैसे थारू भाईनमे माघी आईल ।
सखिए हो माघेक पिली गुरीगुरी जाँर कहत
बरा मनैनके आशिर्वाद लेहत माघी आईल ।।
पाताके दोन्खामे चिख्ना खाईत गोचा मिलाके
महुवक दारु पिएत थारूनमे माघी आईल ।।।
राम अवतार चौधरी, शिवराज न.पा.३, कपिलवस्तु













