रेकर्ड खराब

एक देशमे राजा आउर रानी रहिट । राजा ओ रानीक एकठो छाईके रुपमे सन्तान रठिन । उ छाईक नाउँ ढरले रहै राजरानी । राजरानी बहुट मजा रहठ । आपन डाइ बाबाके जस्टे एकदम मिलनसार बटी । बाबाफे आपन देशके जनतनके बहुट सहयोग करनाहा रठीस । सायद ओहे गुण छाइकमे सरल बटीन । राजरानीक एकठो संघरिया रठिन । उ संघरियक नाउँ हुइन रजनी । रजनी बहुट गरीब, दुखी परिवारके रठी । ओहकान डाइ बाबा एकदम औरेक काम करके किल पेट पल्ना काम करठीन । रजनी फेन खाली समय रहल बेला आपन डाइ बाबाक संग काममे सहयोग कैना करठी । रजनी भरपुर सहनशील ओ सहयोगी बटी । उ फेन राजरानी आपन गोहीक जस्टे ज्ञानी बटी । राजरानी ओ रजनीके मिलनसार स्वभाव देख्के राजा रानी फे आपन छाइहस रजनी हे मन्ठै । रजनी फे आपन सग्गे डाइ बाबाहस मानठ राजारानीहे ।

रजनी गरीब रलेसे फेन उ धनी मनैन जस्टे लगाइ नै खोज्ठी काहे कि रजनीहे पता बटीन कि जिही मै छुए नै सेकम ओकर अस्रा काहे लग्ना । टबमारे आपन सेकट सम कमाके जा लगाइ सेकठी ओहे कपरा लुगा फाटा लगैठी । राजरानी कबु काल आपन कपरा आपन गोही रजनीहे लगालेउ, घाललेउ कहिके सहयोग करठी । रजनी नै लगाइक मन करठीन मने राजरानी गोही कठीन कि जौन मै लगाइटु उ फे टे टोहार हो । जौन टु लगाइटो उ मोर हो । का आपन लगाइल कपरा महिन लगाइ नै देबो ? राजरानी कहठ आपन संघरिया रजनीहे । रजनी कठी लगालेउ ना । मै कब कले बटु कि टु मोर कपरा ना लगाउ कहिके । टोहार कपरा मजा बा, लाव फे बा । मने मोर कपरा पुरान बा । सफा रलेसे फे टोहारमे मोर घालल कपरा नै सुहाइ कहिके रजनी आपन संघरिया राजरानीहे कठी । मने राजरानी नै मन्ठी । मै टोहार कपरा लगैम, काहे कि महिन टोहार कपरा मन परल बा । टु मोर कपरा लगाउ । दुनु जाने साटीक साटा एकदम जस्टे कपरा लगैठै । ओकर कपरा कबु उ लगैना टे कबु उ ।

दुनु जे स्कूल जैना स्कूलसे संगे अइना काम करठै । उ दुनु संघरिया छोट्टेसे लगोट्या यारके रुपमे रठै । छोट्टेसे चिनजान हुइलक कारण उ दुई बीच एकदम घनिष्ठ मैया रठीन । दुनु गोहीन आपन दुनियाँमे रमैठै । समय संगे जवान हुइटी गैलै । समाजके रीति संस्कृति बुझे लग्लै । गाउँ गाउँमे चेतना जगाइ लग्लै । उ दुनुहुनके बीच कोइ बाधा बन्के नै अइलीन । दुनु जे आपन मन परल काम करटी रनै । पह्राइमे निरन्तर लगनशील, मेहनती, इमान्दार, साहित्यप्रेमी, खेलप्रेमी रठै । स्कूलके सब हिस्सामे भाग लेना । जस्टे कि हाइ जम्प, लङ जम्प, सियो धागो, कबड्डी, हाजिरीजवाफ, गुल्ली डण्डा हर खेलके हर भागमे हिस्सा दुनु जे लेठै । असल विद्यार्थीमे हुइ परना गुण दुनु जहनमे रठीन ।

छरछिमेकीमे परल सुख दुखमे भाग लेना काम करठै । समाजके अग्रपंक्तिमे नाउँ अइठीन राजरानी ओ रजनीके । राजा ओ नोकरके बीच बहुट फरक रहट मने जहाँ दोस्ती बा कलेसे राजा रहे या नोकर । कौनो चिजमे कुछ फरक नै परट । काम धन्धा कबु काल अलग हुइ सेकठ मने जिउ ज्यान अक्के बा कलेसे के काही । ओहे फरक दुनु जहनमे रठीन मने समय संगे उ दुई संघरियन बीच कबु दरार नै परलीन । बरु एक दोसर बीच सहयोगके भावनासे नाता झन गाह्र हुइटी गैलीन । राजरानी राज परिवारके एकलौटी छाइ रलेसे फेन ओहकान अलग जातपात, रहनसहन ओ चालचलन राजा अनुसार सबके अलग्गे रहीन । ओस्टके रजनीक फेन आपन जात, भाषा, संस्कृति, धर्म, कर्म, चालचलन, रितिरिवाज, रहनसहन बिल्कुल फरक रठीन । मने उ दुई बीच एक चिज कमन रठीन । एकठो रगत सक्कुहुनके लाल रहठ कना भावना उ दुई जहनके बीच जर गार सेक्ले रठीन । दोसर उ दुईके बीच भावनात्मक नाता एकदम बल्गर रठीन । टबमारे दुनु जे निःस्वार्थ भावना लेके समाजसेवा करठै । एक दोसरके जातपात, रीतिसंस्कृति, रहनसहन, भाषा, संस्कृति, चालचलन साटासाट करठै । उ ओकर घर जाके तिहुवार मनैना काम करठै कलेसे उ दोसर घर जाके टिहुवार मनैना काम करठै । दुनु जे एक दोसर जात, रीतिसंस्कृति प्रति अत्रा घुलमिल होगील रठीन कि भाषासे लेके एक दोसर जातके पूरा इतिहास पता होगिल रठीन ।

समयके खेल संगे दुनु जे राजरानी ओ रजनी सयान हुगिलै । दुनु जे लक्काजवान, एकदम सुन्दरी बिल्गाइ लग्लै । देख्टीकिल मोहनैना मेराइक लोभलग्टीक हुगील रहिट । आब दुनु जे समाजमे चलन अनुसार टरटिहुवार मनाइ लग्लै ।
समय बित्ती गैल । सबके घर अङनामे टरटिहुवारके रौनक छाइगिलीन । अष्टिम्की टिहुवार आइल । राजा कहल कि जा छाइ बजारसे कुछ सामान नान्ले । राजरानी अक्केली बजार जैना मन नै करट । टब राजा आपन संघरिया रजनीहे फेन लैजा । रजनीक फेन अष्टिम्क्याहा सामान किन्ना हुइहीस । राजरानी खुशीसे आपन संघरियाहे सामान किने जाइक लाग सल्लाह करे जाइट । सल्लाह करके दुनु जे सामान किने चल जिठै । सामान किन्के नन्ठै ओ आपन आपन घरओर लग्ठै । गाउँमे अष्टिम्कीके रौनक आउर बह्र जाइट । आब ब्रत बैठ्ना हुइलीन । राजरानी ओ रजनीफे सुन्ले रठै कि आजा पाजा ओ बुदी बुदुनसे । ब्रत बैठ्लेसे मजा गोस्या (ठरवा) मिल्ठै कना । कृष्ण जस्टे बुद्धिमानी मिल्ठै कहिके सुन्ले रठै । राजरानी फेन आपन गोही या संघरियक संगे दुनु जे ब्रत बैठ्लै । रजनी ओ राजरानी मजासे अष्टिम्कीमे ब्रत बैठ्लै । ओस्टके हर मंगरके या शनिच्चरके एकदम ब्रत बैठे लग्लै । भगवानके अराधना करे लग्लै ।

एक दिन राजरानी ओ ओहकान गोही (संघरिया) रजनी ब्रत बैठल रहिट । रजनी कुवामे पानी भरे गैलिन । ओहै आपन संघरिया राजरानीहे भेट हुगिली । भेट होके गफगाफ करे लग्लै । सब पनभरनीन पानी भरके आपन घरक फटरड्ड बट्वाके गैगिलै । मने उ दुई संघरियनके बात ओराइल नै रहिन । राजरानी कहिन कि रजनी होइ महिन टे ब्रत बैठलमे फेन पेट गपसलसह लागठ । पेट भरलहस लागठ । उकुसमुकुस लग्टी रहट । टाकि मै भुख्ले नै हु कनाहस लागठ । एकदम ब्रत बैठ्ना मने पेट भरलहस लग्ना राजरानीहे । मने रजनी भर कहे महि टे गजब भुख लागठ होइ, ब्रत नै बैठल रठुु टब फे ब्रत बैठलहस लागठ । रातदिन भुख लग्टी रहट । मने खोइ काहे टुहिन भर भुख नै लागठ । मै टे नै जाने सेक्नु होइ राजरानी गोही टोहार बात । आपन बात टु अपनही जन्बो कहिके ठिल्यक पानी उठाइट ओ चलजाइट आपन घरे ओर । राजरानीफे आपन राजमहल ओर लग्ठी ।

एक दिनके बात हो । कहाँ टक पह्रना किल हो । कबु काल घुमे परठ कहिके दुनुजे शनिच्चरके दिन आपन गोहीन घर खेले जाइ लग्ठै । जैटे जैटे झोरयामे पुग्लै टे पानी खोब जोरसे पानी आइ लग्लिन । पानी परे लागलमे कहाँ जाइ कहाँ जाइ करलै, एकठो रुख्वाटर पानीसे बचे लग्लै । पानी निम्सल टे आपन संघरियन घर चल गिलै । उहाँ खोब मजासे हाँस खेल करलै, राहरंगी करलै । शनिच्चरके दिन फुर्सदके समयहे हाँस खेलके बिटैलै । जिन्गी जिना क्रममे देशमे औलोके महामारी फैले लागल । महामारीसे टमान जहनके ज्यान चलगिल । औलोके प्रकोपमे दुनु गोही राजरानी ओ रजनी फेन परजिठै । लाख कोशिस करठै मने उ दुनु संघरियनहे बचाइ नै सेक्ठै । दुनु संघरियनके आत्मा यमराजके हातमे परजिठीन ।
राजरानी ओ रजनी दुनुजे संगे यमलोक पुग्ठै । यमलोकमे दुईठो दुवार रहे । एकठो रहे स्वर्ग लोक ओ दोसर नर्क लोक । मुअल मनैन लाइन लागल रठै । यमराज सबके कर्मके फल अनुसार किहु स्वर्ग लोक ओ किहुहे नर्क लोक पठाइट । लाइन लागल क्रममे रजनी ओ राजरानीके पाला अइठीन । रजनीक पाला अइठीन टे रजनीहे स्वर्गलोक मे पठैठीन । रजनी पालाके पाछे राजरानीके पाला अइठीन टे उहकीनहे नर्क लोक पठैठीन । टब दुनु जे एक्के सवाल करठै । रात दिन हम्रे संगे रहि, चाहे जौन काम करली संगे करली । पाप पुण्य संगे करली मने एक जहनहे स्वर्ग लोक ओ दोसर जहनहे नर्क लोक काहे ? टब यमराज राजरानीहे कहट कि– ‘टै ब्रत बैठ्ना टे बैठ्ले मने पूरा ब्रत नै बैठ्ले, मजासे नै बैठ्ले । सबजे टुहिन पुछिट कि टुहिन भुख लागटा कि नै होइ कहिट टे टै का कहिस कि मोर पेटटे भरल हस लागटा, पेट गपसल हस लागटा, बिल्कुल भरखर भात खाइल हस लागटा कहिस । टुहिन कबु भुखे नै लागल टे टोर ब्रत बैठलक का फाइदा । टोर संघरियाहे रजनीहे एकदम भुख लागिस । ब्रत नै बैठलमे फेन भुख लागिस । ओकर भगवान प्रति ढेउर श्रद्धा भाव रहिस मने टै भगवानके भजन किर्तन टे करिस मने टोर ध्यान, मन औरे ओर रहे । कबु भगवान प्रति टोर श्रद्धा भाव नै रहे । टबमारे टुहिहे नर्क मे जाइ परी । टोर पहिलेसे रेकर्ड खराब रहे ।’

टबमारे संघरियो चाहे राजा रहे चाहे रानी या राजपरिवारके रहे । मौत ओ रोज किहुहे नै चिनठ । सबजहन मनसे एक दिन जिहीफे लागे सेकी । एक दिन जिन्गीमे मुना निश्चित बा । चाहे जत्रा धनी या गरीब रहे मौत किहु नै छोरट । उ चाहे जौन परिवारके रहे । राजरानी राजपरिवारके रहलेसे फेन आखिरमे उहिहे नर्क लोक जाइ परलीस । टरे जत्रा भेदभाव रहलेसे फेन उप्पर किहुहे भेदभाव नै रहठ । जिन्गी जिना बा टे मस्त से जिओ । हाँसखेल करके । बल्किउ किहु दुःख दे के नै । सेक्बी कलेसे मित्रताके हात आगे बह्राइ, सत्रुताके हात पाछे हटाई । सबके जय जयकार होए जिन्गीमे । हसिया लेबो कि बेट ? बेट, टोहार ओ मोर सदा दिन भेट । धन्यवाद ।
हाल धनगढी उपमहानगरपालिका–७, भानु चौक देवहरिया, कैलारी गाउँपालिका–६, बेनौली कैलाली