ओंरी भिट्टर नारीनके आवाज
२०७३ साल बैशाख १२ गतेक् दिन रहे । ऊ बेला मै साथी डेस्कटप धनगढीमे हरचाली सम्पादन करे बैठल रहुँ । बत्ती नै रलक् कारण दिन कटैना ढौढौ हुइटी रहे ।
याद आइल २०७२ साल बैशाख १२ गते शनिच्चरके । ऊ बेला देशमे भारी विनाशकारी भुईचाल आइल रहे । इ साल फे ओस्टही भुइचाल आइठ कि कैह्के मनेम कुछ हलचल जनैटी रहे ।
अट्रे किल कहाँ मोर सबसे लग्गक गोचा रामु राजाके याद फेन बारम्बार सटैटी रहल । भुईचाल मे पर्के रामु राजा हम्रहिन से इ संसारसे हाँठ गोर हिलाके चला गैलाँ ।
अस्टके दिन बिटैना क्रममे मोर आँखी साथी डेस्कटपमे रहल ¥यागमे परल । वहाँ टमान मेरके साहित्यिक किताब ढारल रहे । हरचाली अंक १ से ४ सम फेन डेख गैल । मने मोर आँखीक् लजर परल एकठो गजल संग्रह मे । टप्ल्याक्से उठाके हेर्लुं टे ओंरी गजल संग्रह रहे । जेकर लेखिका हुइटी रबिना चौधरी । बस् ओहे किताब हेर्टी दिन बिटल । आब सुनी मोर कुछ अपन बात ओ ओंरी गजल संग्रह के बारेम् ।
मै आझुक मिति से कम्ती मे एक महिना पहिले रबिना हे च्याट मे कहले रहुँ । अपन ओंरी गजल संग्रह पठा डेबी कैह्के । उहाँ जनैले रही साथी डेस्कटप मसे लैजैबी । हाँ–हाँ कहटी बात ओराइल रहे ।
गजल संग्रह हेर्लक ढेर दिन हो गैल रहे । ओहे दिन सरसरटी गजल संग्रह पहरनु । अपन मनके बात गजल मार्फत पन्ना मे उटरना सिपार बटिन रबिना । दुई जोरीन् के सिंगारिक बात, समाज के चित्रण, साँस्कृतिक बात, देश परिवेशके बात, थारु भाषा, साहित्य, नाचगान, गीतबाँसके बात दर्शाइल बा ओंरी गजल संग्रह मे ।
अग्रज पत्रकार ओ साहित्यकार लक्की चौधरीसे लिख गैल भूमिका बहुत वजनदार बनैले बा । गजल संग्रहके भाव ओ कृतिकारके ढेर बात सिमोट गैल बा । अस्तके अग्रज पत्रकार ओ साहित्यकार कृष्णराज सर्वहारी, सुशिल चौधरी, सागर कुश्मी ओ लेखकके बात फेन समेट गैल बा । अग्रज लोगनके कहाइ बटिन रबिना जी अभिन ढेर तिख्खर होके कलम चलाई पर्ना बटिन । यी संग्रह मे देशभक्ति, साँस्कृतिक पक्ष, दादु भैया, दिदी बहिनियन हे गजल मार्फत ढेर पाठ सिखा गैल बा । गजलकार के यी पहिला कृति हुइलक ओर से हुइ यम्ने अभिन ढेर बात सुधारे पर्ना देख जाइठ ।
गजल बिधा मे पैंठे बेर रबिना के सुरुवाती गजल हेरे सेक्ठी ।
मोर साहित्यिक सुरुवात के नाउँ हुइस ओंरी ।
दिलमे सजाके बना ली यिही अपन गोंरी ।
आगे आइ दादु भैया, दिदी बाबु अपनेन के सबजे
अस्रा मे बा अपनेन के लेडी ना यी रब्बु के ओंरी ।
(गजल–१)
जबाना अन्सार लगाम घल्ना ठिके हो मने आधुनिक जबाना आ गैल कहटी किल अपन पुख्र्यानी लगाम लहंगा, बिलोज, ढोटी नै घालके जिन्स पैन्ट मे ठिस डेखैना किही हे मजा लागी । गजलकार अपन लगाम हे सलाम कर्के लगैठी । हरेक साहित्यिक ओ साँस्कृतिक कार्यक्रममे लहंगा, चोलिया घालल् डेखा पर्ठी । रबिना अपन लगाम हे अइसिक सलाम कर्ठी हेरी अपकी इ गजल फें ।
बिहान उठट मोर माथेक मँगिया, पुकारटा टुहिन ।
फुन्ना लागल मोर झोंतिक सगिया, पुकारटा टुहिन ।
चमचम चम्कठ् घेंचक कन्सेहरी, ओ कानेक टर्की,
कचौटि काटल मोर देहेंक, अंगिया पुकारटा टुहिन ।
(गजल–३)
टाइट पाइन्टसे ते हमार लगैना, लेहंगा फरिया मजा ।
पुरान जमानक ठुनियार देखैना, गहना तंरिया मजा ।
औरे फुलाम काहे दर्ना मलजल, दौनाबेबरी रति–रति ।
सुखैलेसे फेन मीठबास देहना, उहे फुलक् डँरिया मजा ।
(गजल–१८)
खैलाड–७, गन्जहुवा, कैलाली जलम होके अपन पह्राइक सिलसिला मे धनगढी मे बैठटी आइल गजलकार रबिना चौधरी थारु युवा मध्ये एक सक्रिय युवा हुइटी । अजकलिक ठँरियन थारु परम्परागत सीप नै सिख के लोप हुइटी बा । यिहे अर्जी कर्ले बटी गजलकार अपन पाठकन हे ।
कहिया बनैबो छैला, हमार सुतना चाकल खटिया ।
नै कतठ टोहाँर बिना, करोट लेहति नम्मा रटिया ।
कतना सुहावन रहि उह रात, जब मै टोहाँर कोनम रहम ।
रातिक् जोनह्या, तोरैयाँ फे चम्कहिं सुनके मीठ बटिया ।
(गजल–६)
रविना चौधरी (रब्बु)
गजलकार अब्बे २५ वैशाख पार करल होनाहार लेखक हुइटी । यहाँ देश मे मेरमेरके हलचल अइटी बा । सबजे अपन अपन पहिचान ओ अस्तित्व खोजटी बटाँ । यी बाटेम फेन रबिना सशक्त होके कलम दौरले बटी । देश हँकुइयन हे खबरदारी फे करले बटी ।
इ देशेक नेता हुक्रन का हुगैलिन, आब हेराई चलि गुरै पाती ।
अइना संविधानमे आपन पहिचानके, सुन्गाई चलि दिया बाती ।
बहुत सहसेक्लि, आब नै सहे सेकब एकलौटी शासन हम्रे सबजे,
आब उठी जुरमुराई यँहाक भूमिपुत्र, सक्कु आदिबासी जनजाति ।
(गजल–८)
इ समय कलक् हमार डाडु भैया, डिडी बहिन्याँ, सक्कु जे जुट्ना बेला हो । हाँठ मे हाँठ मिलाके संगे नेंङना बेला हो । इ समाजहे एकता के माला बनाके हँक्ना बेला हो । रबिना जी फेन इहे पाठ सिखैलै बटीन् अपन पाठक लोगन ।
अपन डाडा भैयन्से कबु घर फुट्न बात नै कर्बी ।
औरेक् जाँगरसे कमाइल सम्पत्ति लुट्ना बात नै कर्बी ।
बचाई पर्ना बा हम्रहिन अपन पहिचान ओ अस्तित्व,
कन्ढामे कन्ढा मिलाई आपसमे छुट्ना बात नै कर्बी ।
ओंरी गजल संग्रह कैलाली जिल्लक् एक नमुना गजल संग्रह हो । इ पोस्टा गजलकार के पहिल पोस्टा हुइन । ढेर जैसिन सिंगारिक् गजल बा यम्ने । इ पोस्टामे मुरद्दफ गजल कुछ जेडा डेख्जाइठ । यम्ने मुसलसल गजल ढेर बा ।
२०७१ साल पुस महिनामे प्रकाशित ओंरीक् बिमोचन २०७१ पुस २८ गते जिउगर साहित्य समाजके आयोजना मे हुइmल पहिल बृहट साहित्यिक ओ सांस्कृतिक महोत्सबमे हुइल रहे । जेकर बिमोचन थारु कल्याणकारी सभा कैलाली के सभापति लाहुराम कैले रहिट । इ पोस्टाके प्रकाशक उर्मा ४ रामपुर के राम चिल्रहुवा हुइट । ओस्टके आबरण डिजाइन नरबहादुर बि। क। कर्ले बटाँ । ६८ पन्ना के इ पोस्टा के मोल एक सय एक रुपिया टोकल बा । कभर के पछिल्का पन्नामे लिखल बा– इ कृतिसे संकलित रकमके ५ प्रतिशत रकम जिउगर साहित्य समाजके कोषमे जम्मा हई ।
अइना दिनमे गजलकार इहिसे मजा डम्डार पोस्टा लेके आँइट कना मोर अर्जी बा । ओ २०७३ सालके सिट्टर सिट्टर सम्झना ओ शुभकामना ।













