थारू महिला ‘गैया बेह्रलै’ पानी मग्टी रातके हर जोट्लै
धनगढी, १९ जेठ । आधुनिक जमानामे सुनेबर एकादेशके कथाहस लग्न थारु समुदायके परम्परागत कला संस्कृति अभिन कायमे रहल बा ।
सुख्खा (खडेरी) परल बेला प्राकृतिसे पानीके माग कर्ना उद्देश्यसे महिलाहुक्रे टमान गतिविधि करके मनैना गैया बेह्रना चलन अभिन फेन कायमे रहल देखा परल बा ।
कैलालीको कैलारी गाउँपालिका–१ हसुलियाके स्थानीय थारु समुदायके महिला (जन्नी) हुक्रे शुकके रोज गैया गोरु बेह्रले (गाईरगोरु छेक्ने) बाटै ।
बहुुट सुख्खा हुइल कहटी हसुुलियाके थारु जन्नीहुक्रे रातके कैलारी गाउँपालिका–५, गोबरैया गाउँसे हर नानके रातके गाउँक् भलमन्सा खुशीराम चौधरी ओ चिराकी छेदुुुराम चौधरीके अंगना जोट्ले बाटै । चिराकी छेदुुरामके अनुुसार रातके उल्टा हर जोटल अभिनय कर्ना ओ प्रकृतिसे पानी माग करल ‘सजना गीत’ गाके ‘गैया बेह्रना कार्यक्रमके सुुुरुवात करल हुइट ।
गैया बेहर्ना टोलीके मोह्रिनिया लैहिया देवी थरुनी लोपोन्मुख परम्परा संरक्षण तथा सम्वद्र्धनके उद्देश्यसे गैया बेह्रल बटैली । ढिउर बरस याहोर गैया बेह्रल कहु नैडेखल बटैटी उहाँ लावा पुस्ताहुकन डेखाइक लाग ओ हस्तान्तरणके उद्देश्यसे गैया बेह्रल जानकारी डेली ।
रातके हर जोटके सुरु करल गैया बेह्रना कार्यक्रम डोसर दिन अर्थात शुुकके रोज थारु (पुरुष) हुकनके परम्पारगत पोषाक धोटी, सर्त, पाइन्ट लगाके कैलारी गाउँपालिका कार्यालय हुुइटी रानामुुडा, बिसनपुर, कुकुुरभुुक्का ओ नवलपुर गाउँसम गैया बेह्रल रहिट । ओहेक्रममे नवलपुरके भलमन्साके गोसिनिया पार्वती चौधरीहे बन्दी तथा गैया बनाके पकरके नानल चिराकी छेदुराम चौधरी जानकारी डेलै ।
गैया बेह्रे गैल पक्ष वास्तविक गैया नैपकरके गैयाके रुपमे गाउँक् मोह्रिनिया (गीतबासमे सिपार), भल्मन्सा या भल्मन्साक् गोसिनियाहे बन्दी बनाके लैजिना प्रचलन बा । जौन अनुसार उहाँहुक्रे नवलपुरके भलमन्साक् गोसिनियाहे बन्दी बनाके नानल जनागिल बा ।
बन्दी बनाके नानलपाछे डोसर पक्षके जन्नीहुक्रे (नवलपुुर गाउँ) आपन बन्दी छुटाइ जाइक परठ । छुटाइ गैल पक्ष ओ गैया बेह्रे जैना पक्षबीच सजनामे लराई कर्ना ओ आपसमे खानपान कर्ना संस्कार रहल जनागिल बा । सजनामार्फत हुइना लराईके प्रभावसे पानी पर्ना जनविश्वास थारु समुदायमे रहल बा ।
गैल बरस कैलारी गाउँपालिकाके लालपुर ओ डम्मारा गाउँक् स्थानीयहुक्रे फेन गैया बेहर्ना कार्यक्रम करल रहिट ।
गैया बह्रना प्रचलन थारु जन्नीहुकनमे रहल प्रचलित लोकनाटकके रुपमे रहल बटागिल बा । थारु संस्कृति विद अशोक थारुके अनुसार गाउँके गल्ली, अंगना, बारीमे प्रदर्शन कर्ना हुइलओरसे यहिहे जाकाल डेखैना सडक नाटक जसिन मानजाइठ । खासकैके बैशाख, जेठतिर समयमे पानी नैपरके खेटुवा लगैनामे समस्या परलपाछे मुक्ति पाइक लाग पानीके माग करटी गैया बेह्रना प्रचलन रहल उहाँ बटैठै ।
ओस्टके, संस्कृति विद थारु गैया बेह्रना प्रचलन बहुट ऐतिहासिक रहल दाबी कर्लै । उहाँ यी प्रचलन महाभारतके विराट पर्व संग जोरल बटैलै । उहाँके अनुसार महाभारतके एक पात्र भीम युद्धके क्रममे किचकके हत्या करलपाछे कौरवपक्षहुकन पाण्डपहुक्रे विराटके दरबारमे बाटै कना शंका पैदा हुइठ । शंकाके आधारमे कौरबहुक्रे सुशर्माके नेतृत्वमे विराटके गैया अपहरण करेक लाग फौज पठाइठै ।
यहेबीच सुशर्माके नेतृत्वमे रहल कौरव फौज ओ विराटपुत्र उत्तरकुमारके नेतृत्वमे रहल फौजबीच लराइ हुइठ । लराइमे विराटके फौज हारजाइठ । पाछे विराट पुत्र उत्तर कुमार युद्ध मैदान छोरके भोगेबर वृहन्नला ९तेस्रो लिंगी० के भेषमे उत्तरकुमारके सारथि बनल अर्जुन फौजके अप्नही नेतृत्व करल ओ युद्ध जिटके अपहरित गैया फकाइल महाभारतके विषयवस्तु संग गैया बेह्रना प्रचलन जोरल बटागिल बा ।
ओस्टके संस्कृति विद थारु महाभारतमे वर्णित अख्यानहे थारु जातिमे फरक प्रयोजनके लाग फरक तरिकसे प्रदर्शन करल बटैलै । ‘गैया बेह्रना’मे संलग्न थारु महिलाहुक्रे विराटके दरबारमे एक वर्षे गुप्तवासमे बैठल बृहन्नला (नपुंसक) रुपी अजुर्नभक्त वीरंगना हुइट । यम्ने गैया अपहरण कर्ना, फलफूल, तरकारी लुट्नलगायत काम बृहन्नला रुपी अर्जुनके साहसिक कामके अनुशरण करल संस्कृति विद थारुके कहाई बा । पहुरा दैनिकबाट













