तराईके जिल्लामे सिकलसे ढिउर प्रभावित

धनगढी, २४ चैत । पछिल्लाका समय कैलालीसहित तराईके जिल्लामे सिकलसे ढिउर प्रभावित बन्टी गैल बाटै । अधिकांश थारु समुदायमे बिल्गैना यी रोगसे ढिउर प्रभावित बाटै ।

जौनमध्ये बालबालिकाहुक्रे फेन ढिउर प्रभावित रहल डेखगिल बा । जौनकारण उहाँहुकन प्रह्राई फेन प्रभावित हुइल अवस्था वाहेर आइल बा । २० वर्षीया एक लौण्डी (नाम गोप्य) कक्षा १२ मे अध्ययनरत बाटी । कैलालीके भजनी नगरपालिकावासी उहाँहे वंशाणुगत सिकलसेल रोग बिल्गाइल बा । उ समस्याके कारण नियमित विद्यालय जाई नैसेक्ठी ।

‘बहुट पीराई लागठ टे विद्यालय जाई नैसेकजाइट’, उहाँ कहली–‘बरसमे ढिउर दिन विद्यालय छुटट ।’ उहाँके अनुसार कबुकाल टे परीक्षा डेना फेन मुस्किल हुइठ । डेलेसे फेन रिजल्ट मजा नैआइठ । कक्षा ११ ओ १२ के परीक्षाके बेला समस्या बल्झलपाछे उ छात्रा ‘प्लस टु’ पास करे नैसेक्ली ।

अभिन डुनु कक्षाके १÷१ विषय पास कर्ना बाँकी बा’, उहाँ समस्या सुनैटी कहली–जसिक टसिक औरे विषय कटैले बाटु ।’ओहे  गरपालिकाके १४ वर्षीया एक आउर लौण्डी फेन सिकलसेलके समस्यासे ग्रसित बाटी । कक्षा ८ मे अध्ययनरत उहाँहे नियमित विद्यालय
जैना बहुट कर्रा बा । प्रायजसिन ठण्डी मौसममे नियमित विद्यालयमे जाई नैसेकजाइठ’, उहाँ कहली– ‘एक्कासी दुखाई हुई लागठ टे हिडडुल कर्ना कर्रा परठ ।’

वंशाणुगत रोग सिकलसेलसे कैलालीमे बहुट बालबालिका पीडित बाटै । उहाँहुकनके अवस्था फेन यि दुई प्रतिनिधिपात्रके जस्टे बा । स्वास्थ्य समस्याके कारण उहाँहुक्रे नियमित विद्यालय जाई नैसेक्ठै । कबु हाडजोर्नीके बहुट पीडासे विद्यालय जैनासे बञ्चित करैले बा, टे कबु उपचारके लाग स्वास्थ्य संस्था जाइक पर्ना बाध्यतासे । दुखाइके कारण उहाँहुकनहे हिड्डुल कर्ना फेन कर्रा हुइठ । नियमित औषधि उपचार नैपाइटसम उ समस्या हप्तैपिच्छे सटैटी रहठ ।

उपचार गरैना ढिला हुइलेसे ढिउर दिनसम विद्यालय जैनासे बञ्चित हुइक पर्ना अवस्था अइटी रहल पीडित विद्यार्थीहुक्रे बटैले बाटै । ‘मै गैल बरस चेकजाँच कराइल बेला सिकलसेल रहल पुष्टि हुइल हो’, २० वर्षीया लौण्डी कहली–‘उ बेलासम सिकलसेलके मात्रा ढिउर बह्रसेकल रहे । जौन कारण कक्षा ११ ओ १२ डुनु परीक्षा डेना बेला बेराम हुइनु ।’ परीक्षा डेहक लाग यी बरस फेन फाराम भरल बटैटी उहाँ आपन स्वास्थ्य समस्या बल्झटी गैल उल्लेख कर्ली । ‘हाल काम फेन करे नैसेकठु’, उ छात्रा कहली–‘मोर डाई ट्युशन पह्रना व्यवस्था करडेले बाटी, मने जाई नैसेकठु ।’

चिकित्सकहुकनके अनुसार सिकलसेल बहुअंगमे समस्या कर्ना रोग हो । ओ पीडितहुकनमे पटक–पटक समस्या बल्झटी रहठ । विरामीहुक्रे लगातार अस्पताल जाइक पर्ना कारणसे उहाँहुकनके नियमित कामकाजसे लेके विद्यालय जैनाहुकनके पढाइसमेत
प्रभावित हुइटी आइल सेती अञ्चल अस्पतालमे कार्यरत फिजिशियन डा. निराजनदत्त शर्मा बटैठै ।

यी रोगके विरामीहुकनहे एकठो महिलासे बच्चा जन्मैना क्रममे हुइना पीडासे फेन कौयौं गुणा ढिउर हाडजोर्नीके दुखाइ हुइठ’, उहाँ आघे कहलै– ‘उहाँहुक्रे तुरुन्त उपचारके लाग अस्पताल जैहिक परठ ।’ कैलालीमे हालसम सिकलसेलके ५८३ विरामी सेती अञ्चल अस्पतालमे दर्ता हुइल बाटै । जौनमध्ये बोहरा, साउँद थरके ८ जाने गैरथारु ओ बाँकी सक्कु थारु बाटै । कम उमेरमे बिल्गैना सिकलसेल सरुवा रोग भर नैहो । रोग बाहक डाई बाबान्के जिनके कारण यी रोग सन्तानहुकनमे देखा परठ । भजनी नगरपालिकाभिट्टर यकर विरामी प्रायः अविवाहित ओ एक्के परिवारके बाटै ।

१९ वर्षीया लौण्डी हाल मोहन्याल माध्यमिक विद्यालय कक्षा १२ मे अध्ययनरत बाटी । नियमित उपचार करैटी आइल उहाँक्मे हाल ढिउर
समस्या नैहो । ५ बरस आघे मोरमे सिकलसेल समस्या बिल्गाइल रहे’, उहाँ कहली–‘उ बेला मै कक्षा ८ मे अध्ययनरत रहु । यहे समस्याके कारण विद्यालय ढिउर छुटल ।’ यी किशोरी ओ २० वर्षीया किशोरी एक्के परिवारके डाडा भैयाक् लर्का हुइटै ।

१४ वर्षीया किशोरीके छ वर्षीय भैयाक्मे फेन सिकलसेलके समस्या बा । युकेजीमे पह्रटी रहल उ लौण्डामे फेन बारम्बार बेराम हुइटी रहठै । ‘डिडी भैया बारम्बार बेराम हुइटी रहठै’, उहाँहुकनके एक आफन्त कहलै–‘जेकर कारण दुनु जाने नियमित विद्यालय जाई नैसेकठै ।’
साँघरियान्मे हेलाहा सिकलसेल समस्यासे जुझ्टी रहल विद्यार्थीहुक्रे अप्ने साँघरियान्से हेलाहा हुइल बाटै । एकओहोर हाडजोर्नी दुखाइके पीडा खेप्टी रहल उहाँहुक्रे लाञ्छनाके पीडा फेन सहन बाध्य बाटै ।

संगे बैठ्लेसे, खेल्लेसे रोग सर्न कहिके साँघरियाहुक्रे अवहेलना करटी आइल १४ वर्षीया लौण्डी दुखेसो सुनैली । ‘संगे नैबैठ कहिके उहाँहुकनके अभिभावकहुक्रे फेन साँघरियाहुकनहे कहठै’, उहाँ कहलै । स्थानीय सरकारके सहयोग भजनी नगरपालिका अति गरिब परिवारके सिकलसेल पीडितहुकनके उपचारके लाग जैना अइना बस भाडा सहयोग करटी आइल बा ।

मने यकिन तथ्यांक नैहुइलओरसे समस्या हुइटी रहल नगरप्रमुख शेरबहादुर चौधरी बटैलै । ‘सहयोगके लाग नीति बनैना ओ यकिन तथ्यांक आवश्यक बा’, उहाँ कहलै–‘गाउँमे शिविर सञ्चालन करके विरामी पत्ता लगैना ओ जनचेतना अभिवृद्धिके काम जल्डी हुइक पर्ना
जरुरी बा ।’

सिकलसेल जीवनभर सटैना हुइलओरसे विरामीहुकनके उपचार आजीवनभरके लाग पूर्ण रुपमे निःशुल्क हुइना आवश्यक रहल डा. शर्माके कहाई बा । उहाँ रोग रोकथामके लाग बाहक दम्पत्तीहुक्रे बच्चा नैजन्मैना उपाय अप्नैना फेन जरुरी रहल उहाँ औल्याइलै ।