कैलालीमे ७ हजारसे ढिउर मानसिक विरामी
धनगढी, १९ कुँवार । कैलाली जिल्लामे सात हजारसे ढिउर विमारी रहल एक तथ्यांक डेखैले बा । जिल्ला जनस्वास्थ्य कार्यालय कैलालीके तथ्यांक अनुसार कैलालीमे सात हजार २७ जने मानसिक स्वास्थ्य समस्या रहल विरामी रहल डेखाइल बा ।
जिल्ला जनस्वास्थ्य कार्यालय कैलालीसे उपलब्ध कराइल तथ्याँक अनुसार आर्थिक बरस २०७२÷०७३ मे २ हजार ७ सय १ जने, ०७३÷०७४ मे २ हजार ३ सय ३४ जने ओ ०७४÷०७५ मे १ हजार ९ सय ९२ जन कैके ७ हजार २७ जने रहल डेखाइल बा ।
उक्त तथ्यांक कैलाली जिल्लाके ३७ ठो स्वास्थ्यचौकी, ४ ठो प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, २ ठो अस्पताल ९टीकापुर ओ मालाखेती०, १७ ठो सरकारी निकायमे दर्ता हुइल निजी अस्पताल ओ सामुदायिक सहरी स्वास्थ्य केन्द्रमे दर्ता होके जिल्लामे आइल जिल्ला जनस्वास्थ्य कार्यालयके प्रमुख टँक चापागाई बटैलै ।
तथ्याँक अनुसार सबसे ढिउर डिप्रेशनके विरामी डेखगैल बाटै । जेम्ने तीनु आर्थिक बरस कैके १ हजार ७ सय ७ जने रहल बाटै । ओस्टके चिन्ता रोगमे १ हजार ६ सय ७५ जने, मृर्गी रोगमे ५ सय २ जने कडा खालके मानसिक रोग मानसिक असन्तुलन २ सय ४ जने रहल बाटै । यी तथ्याँक अनुसार मानसिक रोगके विरामी बह्रटी गैल डेखजाइठ् । यी संख्या बह्रनामे तमान गैरसरकारी ओ सरकारी निकायसे स्वास्थ्यकर्मीहुक्रनहे मानसिक स्वास्थ्य सम्वन्धि तालिम डेहल ओ जनचेतनाके कारणसे बह्रल जिल्ला जनस्वास्थ्य कार्यालय कैलालीके प्रमुख चापागाई बटैलै ।
जनस्वास्थ्य प्रमुख चापागाई कहलै, ‘सेती अञ्चल अस्पतालमे अइना विरामीके संख्या यी तथ्यांक समावेश करल नाइहो । हमार यहाँ अस्पतालसे तथ्यांक नाइ पठाइठ् । अञ्चल अस्पतालमे अउइया विरामीके संख्या समावेश कैना हो कलेसे आउर ढिउर संख्या बह्रे सेकी ।’
उहाँके अनुसार ढिउर जैसिन विरामी भारतके तमान शहरमे जाके उपचार करैना तथा आभिन फेन ढिउर जैसिन विरामी जनचेतना अभावके कारण घरमे बैठ्ना ओ उपचार कराइ नाइ आइल ओरसे संख्या कम हुइ सेकठ् ।
ओस्टके, कैलाली जिल्लामे मानसिक स्वास्थ्यके क्षेत्रमे कार्यरत मानसिक स्वास्थ्य तथा परामर्श केन्द्र ९सी।एम।सी।० नेपालके कार्यक्रम लागु हुइल भजनी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रमे १ सय ७४ जने, जोशीपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रमे ७९ जने, उदासीपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रमे १ सय ३१ जने, चौमाला प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रमे ८१ जने ओ मालाखेती अस्पतालमे २ सय ६७ जने मानसिक स्वास्थ्य समस्याके उपचार करासेकल बाटै ।
परामर्श केन्द्रके मानसिक स्वास्थ्य संयोजक बिष्णु प्रसाद प्रजापतिके अनुसार स्वास्थ्य संस्थामे जचाइ अउइया विरामीमे डिप्रेशन ओ चिन्ताके विरामी ढिउर रहल बटलै । ओस्टके मानसिक असन्तुलन, मृर्गी रोगके विरामी फेन कैलालीमे ढिउर रहल संयोजक प्रजापति बटैलै ।
ढिउर जैसिन विरामी सीमावर्ती शहरमे जाके जचैना, जनचेतना अभावके कारण घरमे नुकैना प्रवृत्ति अब्बे फेन रहल ओरसे विरामी उपचारसे बञ्चित रहल बटैलै । ओस्टके, मानसिक स्वास्थ्य स्वावलम्वन समुह जिल्ला सञ्जाल कैलालीके अध्यक्ष ईश्वरा विक कहली, ‘मानसिक विरामीहे घरमे नुकैलेसे फेन समयमे नै औषधी उपचार कराइ सेक्ले ठिक कराइ सेकजाइठ् ।’ यकर लाग सरकारी निकायसे औषधी उपचार, जनचेतनामुलक कार्यक्रम सञ्चालन तथा उपचारसे ठीक हुइलहुक्रनके लाग जीविकोपार्जन सहयोग जरुरी रहल बटैली ।
सन् २००७ मे विश्व स्वास्थ्य संगठनसे करल अध्ययन अनुसन्धान अनुसार विश्वमे मानसिक रोगके विरामी २५ से ३० प्रतिशत रहल उल्लेख करल बा । साथे नेपालमे मानसिक स्वास्थ्यके क्षेत्रमे कार्यरत तमान सरकारी तथा गैरसरकारी संस्था, स्वास्थ्यकर्मीहुक्रनके कहाई अनुसार २० से २५ प्रतिशत नेपाली जनतामे कौनो न कौनो मेरके मानसिक समस्या रहल बटैटी आइल बाटै । वि.सं. २०६८ सालमे करल जनगणना अनुसार कैलाली जिल्लामे बसोबास करुइया व्यक्तिहुक्रनके जनसंख्या ७ लाख ७५ हजार ७ सय ९ जने रहल बा ।
यी जनसंख्याहे आधार मानके २० प्रतिशत किल मानसिक रोगहे मान्न हो कलेसे फेन करिव १ लाख ५५ हजार १ सय ४२ जनहनमे कौनो न कौनो मानसिक समस्या हुइ सेक्ना अनुमान लगाइ सेकजाइठ् । नेपालमे मानसिक स्वास्थ्यके अवस्था बारेमे अब्बेसम कौनो फेन सरकारी निकाय तथा गैरसरकारी निकायसे बृहत अध्ययन अनुसन्धान करल नाइहो । अब प्रदेश तथा संघीय सरकारसे यी विषयमे नीति तथा कार्यक्रम बनाके गम्भीर होके लाग्न आवश्यक डेखजाइठ् ।













