सरस्वतीके छोट उमेरमे ढिउर सफलता

३ अन्तर्राष्ट्रिय, ४० से ढिउर राष्ट्रिय प्रतियोगितामे सहभागिता, ४५ से ढेर गोल्ड मेडल ओ अवार्ड हासिल

धनगढी, ६ साउन । ‘कुछ नै जानु मै । गेम खेलक लाग बलाइ आइट, घरभित्तर नुक्के बैठु । लम्बु डेख्के हुई घरही आपुगीट’, लम्मा सास टन्टी उहाँ खेल जीवनके कथा सुरु करली ।

कैलालीके धनगढी उपमहानगरपालिका–१ शान्ति टोलमे १४ कार्तिक २०५२ मे बाबा शुक्रराज चौधरी ओ डाई बेल्सी देवी चौधरीके कोखसे सरस्वती चौधरीके जन्म हुइल । बाल्यावस्थामे सघरियाभैयनठे पाटीर ओ ढेंग बिल्गैना उहाँके खेलप्रति खासे लगाव नै रहे । मने आज एकाएक उहाँके उचाई जस्टे उच उहाँके प्रोफाइल हुइल बा । उहाँके उचाई ६ फिट रहल बा ।

‘एक दशक आघेसम टीमके लाग खेलाडी पुगैना कररा होए । मोर उचाई डेख्के टुहिनहे गेम खेले परल कना प्रशिक्षक सर घरही आजाइट’, कैलालीके भलिबल प्रशिक्षक विष्णु चौधरीहे स्मरण करटी उहाँ आगे कली ।

सरस्वती हाल महिला राष्ट्रिय भलिबल टोलीके स्पाइकर एंव एक प्रभावशाली खेलाडी हुइट । कलेसे विभागीय टोली एपिएफके मुख्य स्पाइकर ।

२०६४ सालमे काठमाडौंमे गणतान्त्रिक राष्ट्रिय भलिबल प्रतियोगिता आयोजना हुइल रहे । उहाँ धनगढीस्थित मालिका इंगलिस स्कूलमे कक्षा ७ मे अध्ययनरत रहि । उ प्रतियोगिताके लाग सुदूरपश्चिमाञ्चल टोलीके लाग उहाँहे वैकल्पिक खेलाडीके रुपमे छानगील । जौन प्रतियोगिता उहाँके जीवनके पहिल राष्ट्रिय प्रतियोगिता हो । उहाँ खेलके सुरुवाती अनुभव सुनैटी कहली–‘वैकल्पिक खेलाडी हुइल ओरसे ढेर खेल्न मौका नै पैलेसे फेन हेरके ढेर हौसला मिलल ।’

३ अन्तर्राष्ट्रिय, ४० ठो राष्ट्रिय प्रतियोगिताहे लिड

खेलप्रतिके अभिरुची बह्रटी रहे उहाँहे । उत्कृष्ट प्रदर्शनके सीमा नै रहे । प्रशिक्षकके रोजाईमे परटी गैली । गणतान्त्रिक राष्ट्रिय भलिबल प्रतियोगितामे करल प्रदर्शनसे उहाँ बहुट जहनहे प्रभावित परली । फलतः पोखराके फिस्टेल एकेडेमी उहाँहे छात्रबृतिके अवसर डेहल । उ, उहाँके जीवनके ‘टर्निङ पोइन्ट’ हो । कक्षा ११ समके अध्ययन फिस्टेलमे करल सरस्वतीके ओहैसे व्यावसायिक भलिबल करिअरके सुरु हुइल हो ।

‘मोर खेल जीवनके आधारशिला कना फिस्टेल हो । जहाँसे मै फक्रन वातावरण पैले बटु’, उहाँ फिस्टेलप्रति कृतज्ञता प्रकट करली ।
२०७० सालसे उहाँ विभागीय टोली एपिएफमे आवद्ध बटी । जौन नेपाली भलिबलके सर्वाधिक सफल टोली हो । पाछेक समय प्रायः सक्कु घरेलु प्रतियोगितामे एपिएफके दबदबा बा । एपिएफहे बल्गर टोली बनैनामे उहाँ ६ फिट उचाइके सरस्वती मुख्य स्पाइकरके भूमिका बा ।
उहाँ ‘क्विक स्पाइक ओ ब्लक’ से राष्ट्रिय भलिबलके नतिजाहे सफलताके लग्गे पुगैटी आइल बा । जौन कारणसे फेन उहाँ महिला भलिबलमे नेपालके नम्बर एक क्विक स्पाइकरके छवि बनैले बटी । ब्लक ओ स्पाइक डुनुमे हावी हुई सेक्ना क्षमता हुइल उहाँके सहकर्मी एंव महिला राष्ट्रिय भलिबल टोलीके स्पाइकर नेबिका चौधरी बटैली ।

‘हम्रे ढेउरे गेम संगे खेल्ले बटी । उहाँके स्पाइक ओ ब्लक कैना क्षमतासे प्रतियोगिताहे रोमाञ्चक बनाइठ । जिहीसे प्रतिस्प्रर्धी टीमके प्रयासमे पानी फिरल रहठ’, नेबिका आगे ठप्ली ।

उहाँ हालसम तीन ठो अन्तर्राष्ट्रिय, ४० से ढेर राष्ट्रियसहित टमान क्षेत्रीय स्तरके भलिबल प्रतियोगिता खेलसेक्ले बटी, कि उहाँहे समेत अङग्री गने परना अवस्था बा ।

हालसम खेलल प्रतियोगितामे कत्राके सफलता मिलल ? कना जिज्ञासामे कुुछ बेर अकमकैटी कहली –‘सक्कु याद कैना टे कररा हुइल मने मोर खेलल टीमसे ४५ से ढेर गोल्ड मेडल, २ से ढेर काश्य ओ १० ठो रजत पदक पुगल हुई ।’

सन २०१४ मे आयोजित प्रथम दक्षिण एसियाली आमन्त्रण भलिबलसे उहाँ राष्ट्रिय टोलीमे डेब्यु करली । जौन प्रतियोगितामे नेपाल श्रीलंकाहे हरैटी रजत पदक जिटल रहे । ओकर पाछे उहाँके सहभागिता रहल सेन्ट्रल जोन गेम २०१७ मे फेन रजत ओ २०१६ मे हुइल पहिल साफ गेममे नेपाल काश्य पदकमे चित्त बुझाइ परल । यी तीन ठो अन्तर्राष्ट्रिय स्तरके प्रतियोगिता बाहेक उहाँ राष्ट्रिय स्तरके प्रतियोगितामे आपन क्षमता प्रदर्शन करले रहि ।

किर्तिमानी हस्तीहे पाछे परटी अवार्ड

नेपाल खेलकुद पत्रकार मञ्च २०७० उहाँहे लोकप्रिय खेलाडीके उपाधि स्वरुप खेलकुदके प्रतिष्ठित अवार्ड पल्सर स्पोर्टस अवार्डसे सम्मानित करल । जौन प्रतियोगितामे एसएमएस भोटिङमार्फत क्रिकेटके कप्तान पारस खड्का, फुटबलके युवा स्ट्राइकर विमल घर्तीमगर, एथलेटिक्सके यामसाजन सुनार ओ पौडीके सोफिया शाहहे पाछे परटी अवार्डमे स्कुटी हात परली ।

२०७० सालमे नेपाल भलिबल संघ वर्षके उत्कृष्ट खेलाडीसे पुरस्कृत करल रहे । साथे सशस्त्र प्रहरी आइजिपी कप भलिबलमे फेन उत्कृष्ट खेलाडीके उपाधी संगे स्कुटर ओ २०६९ सालमे ढोरपाटन डबल लिग भलिबलमे राइजिङ खेलाडीके उपाधी संगे स्कुटर पुरस्कार प्राप्त करले रही ।

कोठाभर मेडले मेडल

कम उमेरमे सरस्वतीसे पाइल सफलताके बात करलेसे डाइ बेल्सीके मुहारके चहक बेग्ले बिल्गाए । छाइक सफलता उहाँके मुहारमे प्रतिबिम्बित करे । हालसम खेलके प्रतियोगिता ओ डेहल उपाधीवारे खोजीनीति करेबेर सरस्वती स्वयमहे विवरण डेनामे कररा परल । पाछे डाइ बेल्सीके मदतसे कुछ विवरण उपलब्ध हुइल ।

जब सन्तान सफलता प्राप्त करट । टब अभिभावकहे मिल्ना खुशीके सीमा नै रहट । जेकर ज्वलन्त उदाहरण बेल्सी चौधरीके सन्तुष्ट भाव हो । सरस्वती जै चो सफलता पैली, ओहे बेलाके सामाचारके कटिङ डाइ बेल्सी सजाके फाइलिङ करटी आइल बटी । छाइके फोटोसहित आइल समाचारके कटिङहे लेमिनेसन करके फाइलिङ करल हुइटी । जेकर आधारमे पहुराहे धेरथोर उहाँके खेलयात्राके जानकारी हासिल हुइल ।
‘छाइ हमार शान हो । उहाँ आपनहे पाइल सक्कु सफलताके याद नै हुई । मने मै छाइक खेलल खेलके सामाचारहे असिक सजाके रख्ना करले बटु’, नेपालके मुख्य–मुख्य ब्रोडसिट दैनिकमे आइल समाचारके कटिङ फाइल डेखैटी बेल्सी कहली ।

स्थानीय महिला स्वास्थ्य स्वयमसेविका समेत रहल बेल्सीके खुसीके सीमा ओत्रैमे सीमित नै हो । घरके भित्ताभर छाइक सफलतासे मिलल मेडले मेडल ओ कदरपत्र तथा सम्मानपत्रसे सजैले बटी ।

‘पहिले–पहिले गेम खेले बाहर जाइबेर बहुट रोकु । छाइ मनै कुछ टे नै हुई, कना डर लागे । मने आज छाइ आपन संगे हमार फेन मानसम्मान बह्रैले बा’, बाट करटी करटी खुशीसे गालसम छल्कल आँश पुछ्टी बेल्सी कहली–‘बह्ट जे पुछ्ठै, टु आपन छाईहे का खवइठो ? कहिके मने मोर जवाफ रहट, थारुके घरम का मिलठ ? चौरासी व्यञ्जन नै रहट । ओहे सागपातके झोर टे खाइट ।’

‘खेलाडी बनाइक लाग गरगहना बेच्नु’

सन्तानके भविष्य बनाइक लाग अभिभावकके बरवार भूमिका रहठ । जौन अभिभावकसे कबु नै छुपल बेल्सीके कहाइ बा । उहाँ छाइहे खेलाडी बनाइक लाग १६ ठान चाँदीके सिक्का, एक टोला सुन बिक्री करल सुनैली ।

बेल्सीके परिवारमे गोस्या गोसिन्या, दुई छावा ओ एकठो छाइ (सरस्वती) सहित पाँच जहनके परिवार बा । गोस्या शुक्रराज धनगढीके एक होटलमे कार्यरत बाटै । उहाँके छावा फेन स्वरोजगार बाटै ।

भोजके बारेम सोच्न बेला आइल नै हो

कठै, जब सन्तान जवान अवस्थामे पुग्ठै । टब अभिभावक ओ सन्तानके सम्बन्ध मित्रतामे परिणत हुइठ । सरस्वती ओ उहाँके डाइबीच फेन मित्रता स्थापित हुइटी गैल बा । डाइ बेल्सी छाइ जवान हुइल पाछे छाइक सक्कु बाटमे नजर अन्दाज कैना स्वाभाविक हो ।

‘कबुकाल छाइक भित्री भावना बुझ्न कोशिस करठु । एकदम घर बाहर रहन छाइक कबुकाल केक्रोसंग चक्कर बा कि कहिके ?’, सरस्वती ओर नजर लगैटी बेल्सी मुस्कुरैली–‘मने छाइ कहट, डाइ यी समय भविष्य बनैना बेला हो । अध्ययन पूरा कैना बेला हो । महिन भोजबारे सोच्न फुर्सद नै हो ।’ उहाँ हाल काठमाडौंके शंकरदेव क्याम्पसमे बिबिएस चौठा बरसमे अध्ययनरत बटी ।

बैदेशिक प्रशिक्षणमे जैना पहिल खेलाडी

उहाँ वैदेशिक प्रशिक्षणमे जउइया पहिल नेपाली महिला खेलाडी समेत बनल बटी । वैदेशिक प्रशिक्षणके लाग जापान जैना मौका पाइल रही । जापानमे युनिभर्सिटी अफ टिसुकुबामे करिब एक महिना प्रशिक्षण लेहल रहि ।

खेलमे भविष्य नै हो

२०७४ मंसिरमे नेपाली एथ्लेटिक्सके कीर्तिमानी खेलाडी केशरी चौधरी नेपाल प्रहरीके जागिरसे राजीनामा डेके विदेश पलायन हुइली । राष्ट्रके गहना मानजिना खेलाडीहे राज्य वेवास्ता करल ओरसे खेलाडीके जीविकोपार्जन ओ आर्थिकस्थिति सुधार्न विदेश पलायन हुइना करल बाटै ।
पाछेक समय केशरीके डग्रीमे नेगे परना परिस्थिति सिर्जना हुइटी गैल सरस्वती समेत बटाइ लागल बटी ।

‘शरीरमे शक्ति रहलसम हमे्र खेल खेल्न हो । शरिर साथ नै डेहल या जीवनके उत्तर्राधमे हमार अवस्था का हुई ? यीबारे राज्य बेखबर बा’, उहाँ भावुक हुइटी कहली–‘केशरीके डग्रीमे नेगे नै परी कहिके कहे नै सेकजाई ।’

उहाँ २०७२ से सशस्त्र प्रहरीके सिपाहीके दरबन्दी पैले बटी । सशस्त्र प्रहरी इन्सपेक्टरके जागिर खैना सपना बनैले बटी । मने टमान राष्ट्रिय तथा अन्तर्राष्ट्रिय प्रतियोगिताके बिजेता सरस्वती दुई चो असईके परीक्षामे असफल होसेकल बटी ।