सांसद चुनकुमारीके स्कुल यात्रा : एक अठ्वारसम मुट रोकके बैठ्नु
धनगढी, ५ जेठ । उमेरसे ४१ बरस हुइली प्रदेश नं. ७ के सांसद चुनकुमारी चौधरी । मने उहाँहे बह्रटी गैल उमेरके कौनो मतलब नैहो । उहाँमे बा कलेसे ओहे यूवा जोश, जाँगर, उमंग ओ लगनशिलता ।
ओहोर छावा दीपक चौधरीके ढोरपाटन राष्ट्रिय निकुञ्जमे रेञ्जरके जागिर । याहोर गोसिया लालबहादुर चौधरीके कृषि पेशामे लोभलग्टीक कमाई ओ आपन ‘सांसद’ जसिन सार्वजनिक पदसहितके मान–सम्मानके जीवनशैली । सायद मानैनहे खाइ पुग्न कमाई ओ मानसम्मान हुइलेसे पुगजाइठ ।
मने उहाँहे नैपुगल । सामाजिक मानप्रतिष्ठा ओ खाइ पुग्न कमाईसे उहाँके शिक्षा आर्जनके भोक भर पटक्के नैमेटल । ‘औपचारिक शिक्षा’ प्राप्तिके भोकसे उहाँहे सद्द सटैटी रहल बा । फलतः आपन राजनीतिक जीवन तथा सांसदीय यात्रा संग–संगे स्कूले यात्रा सुरु कर्ले बाटी ।
कैलालीके गोदावरी नगरपालिका–६ बडेहाके उहाँ स्थानीय भागेश्वर आधारभूत विद्यालयमे कक्षा ९ मे अध्ययनरत बाटी । गैल बरस कक्षा ८ मे भर्ना होके बोर्ड परीक्षा उत्तिर्ण करल उहाँ हाल कक्षा ९ के नियमित कक्षा फेन लेटी रहल बाटी ।
जन्मजात कमैया बनल बुवा तेजराम चौधरी ओ डाई बेलमति चौधरीके कोखसे जन्मल सांसद चुनकुमारीके बाध्यकाल जमिनदारके घरमे बिटल । शिक्षा आर्जन कर्ना बेला जहाँ बाबा डाई पुगै उहै जाइक पर्ना उहाँके बाल्यकालके विवशता रहे । अत्रामे सीमित नैहुइल उहाँके शोग लग्टीके जीवन । उमेर १५ पुगलपाछे विवाह बन्धनमे बाँधे परल ओ सुरु हुइल, घरगृहस्थी जीवनके सुरुवात ।
लम्मा सास टन्टी कहली–‘यहाँसम पुगेक लाग जीवनमे ढिउर संघर्ष कर्ले बाटु, करटी बाट् । सायद मोर जीवनमे ग्रहण करे नैसेकल कौनो चीज बाँकी बा कलेसे उ हो, औपचारिक शिक्षा । विद्यमान सामाजिक संरचना ओ गरिबीके कारण शिक्षा आर्जनसे बञ्चित रहु । शिक्षाबिना मानव जीवन कत्रा कहाली लग्टीक रहठ कना बात मै अप्नही भोग्ले बाटु । जीवन जिके फेन पटक–पटक मरल बाटु ।’
ओइसिक टे उहाँ स्कूले यात्रासे पहिले कयौं साक्षरता कक्षा नैलेहल कलेक फेन नैहो । यहाँसमकी उहाँ आधारभूत कम्प्युटर शिक्षा, ड्राभिङ समेतके तालिम लेसेक्ले बाटी । मने जीवनके उच्चतम लक्ष्य प्राप्तिके लाग शैक्षिक योग्यता अनिवार्य रहल उहाँ सुनैठी । आज ओहे लक्ष्य प्राप्तिके लाग शिक्षा आर्जन करेक पर्ना चाहना ओ बाध्यताके कारण स्कूले यात्रा सुरु करल उहाँके कहाई बा ।
ओस्टके उहाँ एकठो घटना प्रसंगवारे स्कूल जाइक पर्र्ना बाध्यता सिर्जना हुइल फेन बटैली । घटनावारे उल्लेख करटी कहली–‘एकठो कार्यक्रम चल्टी रहल बेला एक जाने शैक्षिक योग्यताके बात करटी रहिट । महिन लागठ, उ महिन लक्षित करके कहटहै । ओ कौनो बेला मोर व्यक्तिगत विवरण (बायोडाटा) मागल बेला मै आपनहे बहुट कमजोर महसुस कर्ले बाटु, जौन कारण फेन स्कूले यात्रा सुरु कर्लु ।’
तत्कालीन नेकपा एमालेके कोटासे प्रदेश सांसद बनल चुनकुमारी पहिलेहिसे सामाजिक गतिविधिमे ओत्रही क्रियाशिल बाटी । स्थानीय बडेहा चैटनीपुर महिला सामुदायिक वन उपभोक्ता समूहके उपभोक्ता हुइटी सचिव, अध्यक्षके जिम्मेवारी सम्मारल उहाा पाछे रेञ्जपोष्ट अत्तरिया अन्तरगत फोकोफनके उपाध्यक्ष हइटी २०६३ सालमे पार्टीके क्रियाशिल सदस्यता ओ खानेपानी उपभोक्ता महासंघके केन्द्रीय सदस्य समेत हुइली ।
असिके दर्जनौ संघ–संस्थाके जिम्मेवारी सम्मारल चुनकुमारी स्कूले यात्रा सुरु करही कनाा ढिउर मनै मट्याइना कर्रा बा । यहाँसमके उहाँके परिवारके सदस्यहुक्रे फेन ढिउर दिनपाछे किल जानकारी पैलै ।
उहाँ कहली–‘बहुट संघ–संस्थाके महत्वपूर्ण ओहोदामे बैठल हो कि का, एकफाले स्कूले यात्रा सुरु कर्ना मोर लाग चुनौतीपूर्ण रहे । बेलाबखत घरमे पह्राईके बात करेबर छावा ओ गोसिया नैपह्रलेसे हुइठ कहिके सुझाव डेहिट । २०७३ ओहोरके बात हो, घरमे मजासे सल्लाह फेन नैहुइल रहे । मने पह्रार्ईप्रतिके दृढ इच्छा शक्ति ओ हुटहुटी स्कूल पुगाइल ।’
एकफाले स्कूल पुग्नु टे स्कूलके शिक्षक, विद्यार्थी सक्कु छक्क परल उहाँ बटैठी । स्कूल गैल पहिल दिनके अनुभव सुनैटी उहाँ कहली–‘विद्यालयके किहु फेन पूर्व जानकारी नैरहे । स्कूलमे गैनु, भर्ना हुइनु । मोर कक्षा देखाडेलै । पह्रे सुरु कर्नु ।’
ओस्टके उहाँ, स्कूलके सुरुवाती दिनमे मुटस्ले बैठल फेन यथार्थ अनुभव सुनैली । ‘सुरु–सुरुमे महिन बहुट कर्रा परल । विद्यालय टे जाउ मने कक्षासे बाहेर निक्रन कर्रा लागे । स्कूलके हाफ टाइममे विद्यार्थीहुक्रे खेलै, घुमै, नास्ता खाइठ, मै भर कक्षामे बैठ्ले रहिजाउ । पढाई हुइल विषयके फेयर करु’, उहाँ कहली–‘यहाँसमकी घरमे शौच करेक स्कूल गैल मनै, घरमे जाके शौच करु । हप्तौं दिनसम स्कूलके शौचालय नैगैनु । पाछे पिसाब तथा पथ्थरी सम्बन्धी समस्या बिल्गाइल ओ शौचालय प्रयोग पुगे लग्नु ।’
सक्कुजे दोस्त कहठै
उहाँ आपनहेु सदैव विद्यालयमे विद्यार्थीके दायरामे बैठल बटैठी । विद्यालयके शिक्षकहुक्रे आपनहे नेताके रुपमे हेरले फेन अप्नेभर विद्यार्थीके रुपमे बैठल बटैली । उहाँ आघे थप्ली–‘विद्यालयमे सक्कु विद्यार्थीहुक्रे महिन दोस्त कहठै । मै फेन दोस्त कहिके बोल्कर्ठुु । उहाँहुकनसे बैठके पह्रठु ओ सहयोग फेन लेठु ।’
कक्षा ८ के बोर्ड परीक्षामे मजा रिजल्ट नानके उत्तीर्ण होके उहाँ क्याम्पस पह्रना दृढ इच्छा बनैले बाटी । कक्षा ९ मे ऐक्षिक विषयमे अर्थशास्त्र ओ लेखा रोजल उहाँ पाछे जाके राजनीतिशास्त्रमे डिग्री हासिल कर्ना लक्ष्य बनैले बाटी । सभारः पहुरा थारु दैनिक













