पर्यटक हुक्रन हे लोभ लग्टीक दृष्य, मच्छरी मरना बहानामे मनके भावना सटना मजा माध्यम
धनगढी, २५ वैशाख । वैशाखके चकउवा गर्मी । गाउँघर सुनसान, सडकमे आवतजवात कम । मने लग्गेक् घुराहा लडिया भर बरा सैयर । पूरा लडियाहे तीन लाइन बनाके गेसगिल रहे । डुरेसे सुनजाए–‘कट्रा भारी रावा, प्रहृनीया, याहोर खुस्टल, ओहर खुस्टल ।’
खेतीपाटिके कामसे छुट्कारा मिलल याहोर कैलालीके कैलारी गाउँपालिका–४ भित्तरिया गाउँके स्थानीयहुक्रे गर्मी छल्न ओ रमाइलो कर्ना माध्यम मच्छी मर्न काम बनल बा । कामसे फुर्सद मिलल की, कम्मरमे डिलिया, कन्ढामे टापि, हेल्का, बोककके लडिया, सैर कर्ना स्थानीयहुकनके दिनचर्या बनल हो ।

पर्यटन वर्ष २०७५ के भ्रमण अवधिमे कैलाली जिल्ला भित्तर आई पर्यटक हुक्र थारु समुदायमे मच्छरी मरना परम्पपरागत पेशाहे मजा से अवलोकन करे सेकही । थारु समुदायके महिला हुक्रे मच्छरी मरना बहानामे आपन मनके भावना सटना मजा माध्यम बनैले बाटै ।
कैलाली जिल्लामे थारु समुदायके लाग मच्छरी मरना तलुवा, लदिया, कुलुवा अभिन फेन तमान थो बा । उहाँ हुक्रे खाली समयमे गाउँ भरि सखी हुक्रे राहरंगी करटी लदियामे मच्छरी मारे जैइठै ।
कैलालीमे अवलोकन के लाग आईल पर्यटक हुक्र थारु समुदायके आपन सीप अर्थात (आपन हात लेके बनाईल बाँसके दिलिया), डोराले बिनल टापी, हेल्का बहुट आकर्षक देख जाईथ ।
अत्ना किल नै थारु समुदायके महिला हुक्र घर से बाहेर नै जाके भित्तरके काममे व्यस्त रहठै । उइके मनमे तमान बाट रहठिन् उहे बाट बतुवाईना मजा मौका फेन मच्छरी मरना बेला छोपठै ।
भित्तरियाके लालमति चौधरी कहली–‘आजकाल खेतिपातिके काम ओराइल ओरसे कुछ फुर्सदमे बाटी । समयके सदुपयोग करके दुपहरके मच्छी मर्ठी । जेहिसे समयके सदुपयोग हुइनाके साथे टिना टावनके जुगार फेन होजिना ।’
सामूहिक रुपमे मच्छी मर्ना काम संगे साँघरियानबीच रमाइलो फेन हुइना उहाँहुक्रे बटैठै । ‘आजकाल यी गर्मीमे घरमे बेकामे होके बैठ्नासे टे यहे काम कर्ना मजा, बेलाबखत बैजल्ला फेन होजिना’, मच्छी मरटी रहल सटलरैनि चौधरी कहली–‘डोसरओहोर गर्मी महसुस कम लग्न, डोसर ओहोर एक÷दुई पाह्रके जुगार फेन हुइना ।’
भित्तरिया गाउँके स्थानीय किल नाई, प्रायः थारु वस्तीके फुर्स्दिला तथा घरधन्दा ओ खेतिपाति कर्र्ना व्यक्तिहुक्रे मच्छी मर्नमे सक्रिय बिल्गैठै । घुराहा लडियामे किल नाई, मोहना, कटैनी, सुर्मा, कान्द्रा, रखौना, जखौरलगायत नदीनाला, तालतलैया यी समुदायके जलविहार कर्र्ना थलो हो । ओस्टे फेन, आदिवासी थारु समुदाय जल, जंगल, जमिनमे आश्रित समुदाय हो । अप्नही मच्छी मारके उपभोग कर्ना यी समुदायके संस्कार हो । कौनो दिन ढिउर मच्छी हात पारल बेला पक्ली फेन बनैटी आइल स्थानीय बटैठै । नदीनाला, तालतलैयामे पैना रैथाने जातके रावा, प्रहृनी, सेढरी, डिरा, चरंगी, सिंगी, टेंगना, टिलोरिलगायत मच्छी ढिउर स्वादिष्ट रहना बटाजाइठ । पछिल्का समय खोलानालामे बिष डर्ना, करेन्ट लगैना कामसे जलप्राणी लोप हुइटी गैल बाटै ।
कैलालीके मोहना, घुराहा, कान्द्रा, कर्णाली, पथरैया लगायत लडिया लोपोन्मुख जलप्राणी डल्फिनके वासस्थान फेन हो । बिष डर्ना, फोहर फेकैना गतिविधिसे डल्फिनलगायत जल प्राणी नास हुइटी गैल संरक्षणकर्मीहुक्रे बटैठै । संरक्षणकर्मी विजयराज श्रेष्ठ कहठै–‘‘जल जीवप्रति सचेत हुइना ओ कराइक पर्ना जरुरी बा । हम्रे जल जीवहुकनके उपभोग कर्ठी कलेसे, उहाँहुकनके संरक्षण कर्ना फेन ओत्रहि जरुरी बा ।’













