संस्कृति ओ पहिचान जोगाइक लाग साहित्यकार क्रियाशील
धनगढी,२३ बैशाख । थारु भाषा, कला, संस्कृति जर्गेना कैना साहित्यकार ओ कलाकारहुकनके योगदान ढेर रहल एक कार्यक्रममे जोड डेहल बा ।
धनगढीमे शनिच्चरके रोज आयोजित जिउगर साहित्यक समाजसे रचना वाचन तथा कवि गोष्ठी कार्यक्रममे साहित्यकार तथा पत्रकार यज्ञराज यात्री थारु साहित्यक थारु भाषा कला संस्कृतिके संरक्षणके लाग थारु यूवा पुस्ताके रचनामे निखार अइटी रहल बटैलै ।
उहाँ अपन जीवन साहित्य क्षेत्रमे विताइल अनुभव सुनैटी साहित्यसे कौनो जात धर्मसेफे सक्कुहुनके संस्कृतिमे प्रर्वद्धन कैना उदेश्यसे रचना तयार कैना आग्रह करलै ।
थारु अगुवा चन्द्रसिंह चौधरी थारु समुदायमे लोप हुइटी रहल संंस्कृति जर्गेना कैना साहित्यकार, कलाकार मजा भूमिका निर्वाह करल बटैलै ।
राष्ट्रिय चलचित्र संघके अध्यक्ष विनय बैद्य पहिले थारु साहित्य ओ कलाकारिताके विकास नइहुइलेसे पाँच बर्ष यहोरसे भारी फडको मारल बटैलै । कार्यक्रमके सभा अध्यक्ष जीत चौधरी ‘ट्रासन’ साहित्य क्षेत्रमे रुची रखुइया सक्कुहुनहे जिउगर साहित्यक समाज समटके आघे बह्रना बटैलै ।
कार्यक्रममे गजलकार छविलाल कोपिला, सागर कुश्मी, एच। एम। चौधरी, रामचरण अजराइल, दुर्जन चौधरी, रोदनसिंह चौधरी, गंगा डंगौरा, सेबेन्द्र चौधरी अपन अपन गजल सुनैले रहिट । उहाँहुक्रे गजल, मुक्तक मार्फत कलासंस्कृति जोगैनाके साथे पहिचानमे जोड डेहल रहे ।
ओस्टेक थारु कलाकार खेम चौधरी विगत कुछ बर्ष यहोर थारु गित तथा म्यायूजिक भिडियो ढेर अइटी रहल बटैटी सांस्कृति ओ आधुनिक गिता सुनैले रहिट ।
कार्यक्रमके संचालन जिउगर साहित्यक समाजके सचिव सत्यनारायण दहित करले रहिट । ओस्टेक कार्यक्रममे थारु भाषा तथा साहित्य संरक्षण मञ्चद्धारा प्रकाशित लावा डगर त्रैमासिकके आजिवन सदस्यहुकनहे प्रमाण पत्र डेहल बा ।













