कोइलहुवा टलुवामे ८० लाखके मच्छी उत्पादन

कैलाली, १४ फागुन । कैलारी गाउँपालिका–९ कोइलहुवा टलुवामे एक्के सिजनमे ८० लाखके मच्छी बिक्री वितरण हुइल बाटै ।

मच्छी पालनके बलगरसम्भावना रहल उ टलुवामे ८० लाख बराबरके मच्छी उत्पादन करके बिक्रि वितरण करगिल हो । बिगत लम्मा समयसे टलुवा ठेक्का लेके व्यावसायिक मच्छी पालन करटी आइल बाँके कोहलपुरके कृष्ण गिरी यी बरसके सिजनभर चार सय कुन्टल मच्छी बिक्री करल जानकारी डेलै ।

‘यी बरस सिजनभर चार सय कुन्टल मच्छी बेच्के ८० लाख रुप्याके कारोबार हुइल बा,’ गिरी कहलै– ‘आब लगभग टलुवामे मच्छी ओरागिल बाटै ।’

२० बरससे कैलालीके टमान टलुवा ठेक्कामे लेके व्यावसायिक मच्छी पालन करटी आइल गिरी कोइलहुवा टलुवाहे पाँच बरसके लाग एक करोड ४० लाख रुप्यामे ठेक्का लेले बाटै । ठेक्का अवधि आब दुई बरस बाँकी रहल बा । ७२ हेक्टर क्षेत्रफलमे फैलल कोइलहुवा कैलारी गाउँपालिकामे परना बरवार प्राकृतिक ताल हो ।

उ टलुवामे गिरी रहु, सिल्भर, बिगहेट, कमनकार्प, भाँकुर, सिल्भर जातके मच्छी पल्ले रहिट । यहाँ उत्पादित मच्छी बजार पाइ लागल गिरी बटैलै । कोइलहुवा टलुवामे उत्पादन हुइल मच्छी कैलालीके चिसापानी, धनगढी, हसुलिया, कञ्चनपुरके महेन्द्रनगरसम खपत हुइल बाटै ।

स्थानीय स्तरमे उत्पादित ताजा मच्छीके बजार मजा हुइलेसे फेन भारतसे आइल मरल मच्छीके कारण बजार मूल्य प्रभावित हुइना करल गिरी बटैलै । यद्यपि, हमरे जित्ती ओ ताजा मच्छी बेचल कारण यी बरस स्थानीय स्तरमे उत्पादित मच्छीके माग ज्यादा रहे, उहाँ कहलै– ‘भदौसे फागुनसम स्थानीय उत्पादन बजारमे बिक्री करले बाटी ।’ एक सय नौ से ढेर तालतलैया रहल कैलाली मच्छी पालनके लाग सम्भावनायुक्त जिल्ला मानजाइठ ।

मने, बरसभर पुग्ना उत्पादन नै होके वार्षिक तीन करोड रुप्या बराबरके मच्छी भारतसे आयात हुइना करल सरकारी तथ्यांक बा । चैतसे सावनसम यहाँ मच्छीके उत्पादन नै हुइट ।

भारतसे मच्छी अइना नैरुकलेसे फेन कुछ महिनाभर स्थानीय उत्पादनसे मच्छीके मागहे पुरा करटी रहल गिरी बटैलै । ‘यी बरस हमरे ताजा जलकपुर बिक्री करल पाछे कुछ हदसम भारतसे अइना मच्छी जलकपुरके कारोबार कम हुइल रहे’, उहाँ कहलै ।

गिरी वार्षिक २८ लाख रुप्या तिरना ताल ठेक्कामे लेले बाटै । ठेक्का सहित मच्छी पालनमे एक बरसमे ६० लाख रुप्यासम लगानी करटी रहल गिरी जानकारी डेलै । उहाँ हर बरस टमान प्रजातिके ३०/४० लाख भुरा मच्छी टलुवामे डरटी आइल बाटै ।

कोइलहुवा टलुवामे व्यावसायिक मच्छी पालन होके २५/३० जने रोजगारी फेन पैले बाटै । स्थानीय कुछ मनै उ तल्वाके मच्छी टमान ठाउँमे बिक्री करके मजा आम्दानी करल कर्मचारीके रुपमे मच्छी पालन काममे सक्रिय धनवीर चौधरी बटैलै ।

‘हमरे मच्छी उत्पादन करलेसे फेन खुद्रामे मच्छी विक्री करक लाग स्थानीय परिचालित हुइठै ।’ उहाँ कहलै–‘मच्छी बिक्री करके उहाँहुक्रे फेन मजा आम्दानी करले बाटै ।’

कोइलहुवा टलुवासे सिजनके अवधीमे एक दिनमे दुई कुन्टलसम मच्छी बिक्री करल चौधरी जानकारी डेलै । ‘अब्बा मच्छी ओराइ लागलपाछे दैनिक ५०/६० किलो बिक्री हुइठ ।’ उहाँ कहलै । कैलालीके घोडाघोडी ओ उ आसपासके कुछ टलुवा बाहेक जिल्लामे रहल प्रायः सक्कु प्राकृतिक तल्वामे व्यावसायिक मच्छी पालन हुइटी बा ।

जिल्लामे रहल टमान प्राकृतिक तल्वामे ४० जने व्यावसायिक मच्छी पालन करटी रहल मच्छी व्यवसायी संघ कैलाली जानकारी डेले बा । मने, मागहे धन्न मेरके मच्छी उत्पादन नै होके धनगढी, अत्तरियालगायतके बजारमे भारतसे आयातित मच्छीके कारोबार अभिन फेन उच्च रहल बा ।