थारु समुदायमे ढाक बजैना प्रथा कायमे
धनगढी, अगहन । कार्तिक महिना सुरुवात संगे कैलालीके कैलारी गाउँपालिका–९ बनकनरीके स्थानीय डाङडुलरु थरके थारुहुकनके व्यस्तता बह्रल बा ।

पुखौैसे ढाक बजैना काम करटी उहाँहुकनके कार्तिकसे पुस महिनासम ढाक बजैना समय अवधी हो । जौनकारण थारु वस्तुमे ढाक बजाइक लाग माग हुइल संगे उहाँहुकनके व्यस्तता बह्रटी आइल बा । आधुनिकताके क्रम संगे तान्त्रिक विद्याके महत्व घट्टी गैलेसे फेन थारू समुदायमे विद्यमान ढाक बजैना प्रथा संगे उहाँके व्यवस्तता पहिलेक जस्टे कायमे रहल हो ।
बनकनरीके स्थानीय चुन्नुराम डाङडुलरु (थारू) अगहन महिनाके सुरुवात संगे ढाक बजैना कामके शिलशिलामे घरसे निक्रल रहिट । कुछ हप्ता आघे घोडाघोडी मन्दिरमे आयोजना करगिल बृहत लवांगी पूजाके क्रममे उहाँ रातभर ढाक बजाइल रहिट । आज अट्वारके रात उहाँ कैलारी गाउँपालिका–६ बेनौलीमे ढाक बजैना हुइल बा । बेनौलीके स्थानीयहुक्रे गुरुवा उत्पादनके लाग ढाक बजाइक लाग बलाइलपाछे ढाक बजाइ जैटी रहल बटैलै ।
थारू समुदायमे ढाक अर्थात गुरुवा (तान्त्रिक) उत्पादन कर्ना ओ विशेष पूजाके अवसरमे बद्य सामग्री बजैना कामहे बहुट महत्वके साथ लेजाइठ । हरेरी पूजा, लवांगी पूजा, चैती पूजालगायत अवसरमे अनिवार्य ढाक बजाई पर्ना प्रचलन उहाँ जानकारी डेलै ।
ढाक बजैना प्रचलन थारू समुदाय भिट्टरके ‘डाङडुलरु’ अर्थात ‘ढकेरहुवा’ थरके थारू समुदायके प्रचलन हो । आजकाल यि थरके थारू समुदायके बुढापाखाहुक्रे ढाक बजैना काममे लागल बाटै । उहाँहुक्रे कार्तिकसे अगहन महिनामे हुइना लवांगी पूजाके अवसरमे ढाक बजैना काममे लागल हुइट ।
कैलाली जिल्लामे एकदमे कम संख्यामे रहल उ थरके थारूहुक्रे कैलाली, कञ्चनपुर ओ बर्दिया जिल्लाके टमान ठाउँमे फेन ढाक बजैना नेउटा आइल संगे पुग्टी आइल बाटै । जेकर कारण ढिउर माग नैरहलेसे फेन पुर्खौली परम्पराके संरक्षण संगे सामान्य घर खर्च चलैनामे सहयोग पुग्टी रहल उहाँके कहाई बा ।
ढाक बनैना ओ ढाक बजैना संस्कार रहल डाङडुलरु समुदायके थारूबुद्धिजीवीहुक्रे ढाक बजैना संस्कार बहुट ऐतिहासिक रहल दाबी करटी आइल बाटै । उहाँहुकनके अनुसार सत्ययुगमे शिव ओ पार्वती ढाक ओ काँस (एक प्रकारके धातु) सिर्जाके गाउँ–गाउँमे भिख मागके विविकोपार्जन करल विश्वास राख्टी आइल बाटै । पाछे कालान्तरमे थारू समुदायके डाङडुलरुहुक्रे अनुशरण करल जनविश्वास रहल हो ।
डाङडलरु थरके थारूहुक्रे ढाक बनैना काममे एकदमे निपूर्ण रहनाके साथे तान्त्रिक विद्यामे फेन निपूर्ण मानजिठै । उहाँहुक्रे ढाक बजैना काम संगे गुरुवा बनाइक लाग गैना मन्टरफेन संग–संगे गैठै । जौनक्रममे गुरुवा चह्रैना ओ हटैना मन्टर गाइक पर्ना बटैठै चुन्नुराम डाङडुलरु । ‘देउता बनैना, लौव गुरुवा बनैना, मन्टर जगैनालगायत काममे हम्रे ढाक बजैठी’, उहाँ आघे कहलै–‘जौनक्रममे धर्तीक जल्मौटी, मैयक जल्मौटी, खेटौटी, गुर्बाबाक जल्मौटी, छुट्की फूलवार, बरका फूलवार, पच्रा, जगरनठियक पच्रा, भेरुवक पच्रालगायत मन्टर गाइक पर्ना रहठ ।’
डाङडुलरु थारू समुदाय अलगे पहिचान बोकल थारू समुदाय हो । जेकर पूजापाठ कर्ना वैवाहिक संस्कार फेन बहुट फरक रहल बा । यी समुदायभिट्टर डसियाके बेलामे गाउँघरमे भिख मागल चाउरके ढिक्रि बनाके देउतन पूज्ना फेन चलन ।
ओस्टके आपन थर भिट्टर वैवाहिक सम्बन्ध नैहुइना प्रचलन रहल यि समुदायमे पहिले–पहिले लौव भोजही दुल्हा ओ दुलनियाहुक्रे ३ या ५ या ७ दिन गाउँ–गाउँमे भिख मागेक पर्ना प्रचलनमे रहे । मने आजकाल भिख मग्न चलन हटसेकल उहाँहुक्रे बटैठै ।
आपन चलनबारे जानकारी डेटी चुन्नुराम डाङडुलरु कहलै–‘मोर भोज हुइल टे, हमार संस्कार अनुसार मै ओ मोर गोसिनिया कुछ गाउँमे भिख मागल रही, मने आजकाल भिख मग्न चलन हेरागिल बा ।’
डमरुसे ठोरचे बरवार रहना ‘ढाक’ बनैना फेन यी समुदायमे अलग्गे टौरतरिका रहल बा । खंमार जातके कठुवाक् घेरा ओ लौव बनल गुरुवासे पुजल छेग्रक छालासे ढाक बनाजाइठ । ओस्टके बजैना तरिका फेन एकदमे फरक रहल जनागिल बा ।
हाल डाङडुलरु थरके थारू समुदाय ढाक बजाइल बाफत कुछ पारिश्रमिक फेन लेटी आइल बाटै । उहाँहुक्रे एक रातभर ढाक बोलाइल बाफतके ज्याला घरौरा दुई पसेरी (साढे दुई किलो) एक नम्बर धान लेटी आइल जानकारी देले बाटै ।
थारू समुदायके प्राय पूजा गाउँभरके एक साथ रहना हुइल ओरसे घरौरा लेटी आइल हुइट । ‘दुई महिनाके अवधीमे करिब ५० से ६० हजार कमाई हुइटी बा’, चुन्नुराम कहलै ।
वर्तमान समयमे ढाक बजाके जिविकोपार्जनमे समस्या आइलपाछे डाङडुलरु थरके थारू समुदायके लौव पिढीहुक्रे आपन पुर्खौली संस्कारसे अनविज्ञ रहल चन्नुराम डाङडुलरुके कहाई बा । कैलाली जिल्लामे उ थरके थारू समुदाय एकदमे कम संख्यामे रहल बा । संस्कारजन्य पेशासे विविकोपार्जनमे समस्या हुइलपाछे खेतीके साथ अन्य व्यावसायिक काम करटी आइल हुइट ।













