पेन्डिया पूजाके प्रचलन थारु समुदायमे 

धनगढी, २६ कात्तिक । थारू समुदाय मौलिक कला, संस्कृति, चाल चलन/प्रचलनके भण्डार हो कलेसे फरक नाई परी । कौनो फेन कामके सुरुवात करेबर होए, या समापन करेबर । सुरुवात ओ ओरौनी विधिपूर्वक कर्ना प्रचलन थारु समुदायके मौलिक विशेषता हो ।

जौन कतिपय चाल चलन लोप हुइल बा, कलेसे कौनो चलन आज फेन कायमे रहल बा । आजकाल थारु समुदायमे धान भित्र्¥याइना काम अन्तिम चरणमे पुगल बा । धान डौनीके उ अन्तिम दिनहे थारु समुदायमे ‘पेन्डिया’ कहिजाइठ । पेन्डिया पूजा आज फेन थारु समुदायमे कायमे बा । निश्चित विधि अनुसार यि पूजा एकल तथा सामूहिक रुपमे मनैना प्रचलन आज फेन कायमे रहल हो ।

हाले गौरीगंगा नाप (साविक उदासीपुर–१)भगतपुरके स्थानीयहुक्रे सामूहिक रुपमे विधिपूर्वक पेन्डिया पूजा मनाके राहरंगी करले बाटै । गाउँक् भलमन्सा तथा गुरुवा दासुराम चौधरी पेन्डिया पूजामे धान डौनीमे प्रयोग हुइना औजार तथा अन्नके पूजा कर्ना प्रचलन रहल जानकरी डेलै ।

उहाँके अनुसार पूजाके क्रममे धान डौनीमे प्रयोग हुइना, अखैन, बहर्नी, हसिया, कोड्रालगायत उपकरणके पूजा कर्ना प्रचलन बा । भित्र्¥याइल धानमे दुनियाके नजर नालागे ओ बरकट आए कना उदेश्यसे पेन्डिया पूजामे गाउँक् गुरुवा तथा घरेक् गुरुवासे घर, अगंना बाँढ्ना प्रचलन रहल गुरुवा दासुराम चौधरी बटैलै । यहेबीच आपसमे राहरंगी करजाइठ ।

भगतपुरके स्थानीयहुक्रे एक ठो बरवार सुरा मारके खानपान संगे राहरंगी करके सामूहिक रुपमे पेन्डिया मनाइल रहिट ।थारु समुदायमे धान डौनी विधिपूर्वक ओराइल संन्देश डेना फेन पेन्डिया पूजाके विशेषता हो