पहिचान जोरल थारु नाँच लोप हुईटी

कैलाली, असोज । २० बरष पहिले कैलालीके पवेरा गाउँ विकास समितिमे परना जबदहुवा गाउँमे मोतिके रुखुवा
(मोतीके पेंडा) नामक थारु नाच लोकप्रिय रहे । जिल्लामे अक्केथोकिल यी नाच थारुहुक्रनके लाग गर्व करना लायक रहे । मने, लौव पुस्तामे हस्तान्तरण हुई नाइ सेकल पाछे यी लोप हुईल दुई दशक होसेकल एक अध्ययन देखैले बा ।

मोतिके पेंडा नाच जस्ते थारु समुदायमे रहल विशेष महत्वके पूरान कुछ नाच फेन लोप हुईटी रहल बा कलेसे कुछ खतरामे रहल बा । अब्बे मोतिका पेंडा सहित पैंया नाच, बड्का नाच झण्डे लोप हुईना अवस्थामे पुगल थारु संस्कृतिके विज्ञ अशोक थारु चौधरी जानकारी देलै । उहाँ आपन तमान अध्ययनके क्रममे २२ प्रकारके पैंयामध्ये १७ लोप होसेकल ओ बड्का नाचके अवशेष बर्दिया ओ कैलालीमे थोर बहुट किल रहल बतैलै ।

मोतिका पेंडा गितीकथामे आधारित नाच हो । यी खरोन रसमे नाचजाईठ । कैलालीके जबदहुवा गाउँमे किल नाचजैना हुईल ओरसे यकर लोकप्रियता सक्कु ठाउँमे रहे । मने, मन्द्रा बजुईया व्यक्ति बितलपाछे यी नाचमे पूर्ण बिराम लागल दाङके विज्ञ अशोक थारुके कहाई बा ।
दुई दशक आगे नै २२ मेरके नाचजैना पैंया नाच फेन अब्बे लोप हुईटी पाँचमे किल सिमित हुईल बा । कैलाली, कञ्चनपुर, बर्दिया, बाँके, सुर्खेत ओ दाङ कैके छ जिल्लाके थारु पैंया नाच नाँचित ।

ओस्तके, जादुके नाच कहिके चिनजैना बड्का नाच फेन लोप हुईना अवस्थामे आपुगल बा । कैलाली ओ बर्दियाके एक÷दुई टिम यी नाच नच्लेसे फेन उ प्रर्याप्त नाई रहल संस्कृति विद्व थारुके कहाई बा । बड्का नाच गुरुवाहुक्रे तन्त्रमन्त्र सहित नच्ना करल
बताजाईठ ।

ओस्तके थारु समुदायसे नाचजैना अत्यन्त पूरान नाच मध्येके कठ्घोरी नाच फेन एक हो । यी नाच लोप हुईना खतरामे नाई परलेसे फेन यकर आयु अब ३० बर्षसम किल रहल संस्कृतिविद्व थारुके कहाई बा । उहाँ धिरेधिरे यी नाच समेत खल्हुवा ओर जैती रहल
बतैलै ।

पुरुष वर्ग घोडुवा बनके नाच जैना हुईल ओरसे यिहीहे कठ्घोरी नाच कहिगैल बताजाईठ । अब्बे कैलालीमे बरसमे कौनो ठाउँमे एक चो नच्ना ओ दाङके देउखुरीमे यी नाच नाचजाईठ । दङ्गालीहुक्रे कैलालीके गोबरैला गाउँसे सिखके कठ्घोरी नाचहे जिबन्त राखल कहाई बा । मने, यहोर गोबरैला गाउँमे यकर अवशेष समेत नाई हो ।

थारु समुदायके यी पुरान नाच विशेष महत्वके नाच होवई । हरेक नाच छुट्टाछुट्टे लोक विश्वास ओ अलौकिक शक्तिमे आधारित रहल बताजाईठ ।

लौव पुस्तासे अंगालल् ओ जानलहुक्रे हस्तान्तरण कैना प्रर्यत्न नाई करलेसे यी नाच कुछ दशकपाछे थारु समुदायके लाग दन्त्य कथामे सिमित हुईना विज्ञ थारुके कहाई बा ।

“पूरान नाच जानल पुस्ता मरके गैल पाछे अईसीन नाच एकादेशके कथा जस्ते हुईना निश्चित बा”, उहाँ कहलै–“आब अईसीन नाचके संरक्षण कैना जिम्मेवारी हमार सबके होवई ।”

उहाँ नेपाल सरकारके संस्कृति मन्त्रालयसे यी ओ अईसीना नाचके विस्तृत अध्ययन अनुसन्धान कैना थालनी हुईटी रहल बतैलै ।
ओस्टेक डश्या अइना से पहिले शुरु हुके एक महिनासम नच्ना थारु समुदायके सदावहार नाँच सखिया यी साल अभिनसम शुरु नाइहुइल हो । थारु गाउँमे हरेरी पूजापाछे सखिया शुरु कैजाइथ ।